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फेक न्यूज और दुष्प्रचार: लोकतंत्र, समाज और राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरा

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मोहित मौर्य।

फेक न्यूज क्या है और यह लोकतंत्र व आंतरिक सुरक्षा के लिए क्यों खतरनाक है?

लखनऊ। फेक न्यूज झूठी या भ्रामक जानकारी होती हैं जिन्हें वैध रूप में प्रस्तुत किया जाता है। इन्हें जानबूझकर धोखा देने या नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से बनाया जाता है। ये अक्सर सोशल मीडिया के माध्यम से तेजी से फैलती हैं। इन्हें राय बदलने या उकसाने के लिए भी गढ़ा जाता है, जिसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

फर्जी खबरें समाज में भ्रम, नफरत और हिंसा फैलाकर बेहद हानिकारक साबित होती हैं। यह लोगों को गुमराह करती हैं और निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित करती हैं। फर्जी खबरें धार्मिक या सामाजिक समूहों के बीच नफरत का कारण बनती हैं। स्वास्थ्य संबंधी गलत जानकारी जान जोखिम में डाल सकती हैं। देश विरोधी ताकतें Deepfakes या झूठे दुष्प्रचार से देश की स्वाभाविक आर्थिक एवं लोकतांत्रिक प्रक्रिया को विकृत कर सकती हैं, जिसका विपरीत प्रभाव आंतरिक सुरक्षा पर पड़ता है। लोग सही-गलत में अंतर नहीं कर पाते, जिससे समाज में डर, चिंता और निराशावादी सोच बढ़ती है तथा विश्वसनीय सूचना स्रोतों पर भरोसा कम होता है।

फेक न्यूज सोशल मीडिया के माध्यम से अत्यंत तीव्र गति से फैलती हैं, जिसका मुख्य कारण प्लेटफॉर्म्स का एल्गोरिदम, डीपफेक तकनीक, भावनात्मक एवं भड़काऊ सामग्री तथा उपयोगकर्ताओं द्वारा बिना सोचे-समझे शेयर करना है। यह गलत सूचना एजेंडा चलाने, लोगों को धोखा देने और समुदायों में विभाजन पैदा करने के लिए डिज़ाइन की जाती है। उपयोगकर्ता केवल अपनी विचारधारा से मिलती-जुलती सामग्री देखते हैं, जिससे उन्हें फर्जी खबर ही सच लगने लगती है। अक्सर फर्जी खबरें गुमनाम या फर्जी अकाउंट्स से शेयर की जाती हैं, जिससे स्रोत का पता लगाना मुश्किल होता है।

भारत में सोशल मीडिया (WhatsApp, Facebook, X) पर फर्जी खबरों के हालिया उदाहरणों में एआई-जनित (AI) डीपफेक, साम्प्रदायिक तनाव फैलाने वाली पोस्ट तथा युद्ध-संबंधी भ्रामक वीडियो शामिल हैं। COVID-19 महामारी के दौरान घरेलू उपचार, फर्जी सलाह और साजिश संबंधी सिद्धांतों जैसी गलत सूचनाओं को सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया गया था।

फर्जी समाचार या दुष्प्रचार आज के डिजिटल युग में एक बड़ी चुनौती है, इसलिए इसे रोकने के लिए कुछ जवाबी उपाय अपनाना बेहद आवश्यक है। सबसे पहले खबर के स्रोत की विश्वसनीयता जांचनी चाहिए और यह देखना चाहिए कि वह किस वेबसाइट या सोशल मीडिया हैंडल से आई है। अज्ञात या संदेहास्पद URL वाली साइटों से बचना चाहिए। केवल चौंकाने वाली या क्लिकबेट हेडलाइंस पर तुरंत भरोसा नहीं करना चाहिए तथा लेखक का नाम और उसका रिपोर्टिंग इतिहास भी जांच लेना चाहिए। किसी भी खबर की पुष्टि अन्य भरोसेमंद समाचार माध्यमों से अवश्य करनी चाहिए, क्योंकि वास्तविक खबरें कई प्रमुख स्रोतों पर उपलब्ध होती हैं। फोटो या वीडियो की सत्यता जांचने के लिए Google Reverse Image Search का उपयोग करना चाहिए ताकि यह पता चल सके कि वह पुरानी या एडिटेड तो नहीं है। उन खबरों से सावधान रहना चाहिए जो अत्यधिक गुस्सा या डर पैदा करती हैं, क्योंकि अक्सर वे भावनात्मक अपील के माध्यम से दुष्प्रचार फैलाती हैं। साथ ही खबर की तारीख और संदर्भ भी अवश्य देखना चाहिए, क्योंकि कई बार पुरानी खबरों को नया बताकर साझा किया जाता है।

एक जिम्मेदार नागरिक से अपेक्षा की जाती है कि वह फर्जी खबरों को रोकने में सक्रिय भूमिका निभाए। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे Facebook, Twitter या WhatsApp पर कोई फर्जी पोस्ट दिखाई दे तो उसे तुरंत “Report” और “Block” करना चाहिए, ताकि उसका प्रसार रोका जा सके। यदि किसी खबर पर संदेह हो तो PIB Fact Check जैसी फैक्ट-चेकिंग वेबसाइट्स से उसकी पुष्टि करनी चाहिए। बिना जांचे-परखे किसी भी जानकारी को फॉरवर्ड नहीं करना चाहिए, विशेषकर व्हाट्सएप समूहों में, क्योंकि एक गलत शेयर कई लोगों तक भ्रम फैला सकता है। साथ ही अपने परिवार और मित्रों को भी फर्जी खबरों की पहचान करना सिखाना चाहिए तथा जागरूकता फैलानी चाहिए। डिजिटल दुनिया में सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है, इसलिए किसी भी जानकारी पर विश्वास करने से पहले “रुको, सोचो और फिर शेयर करो” का नियम हमेशा अपनाना चाहिए।

फर्जी खबर फैलाने पर कानूनी कार्रवाई के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 में कड़े प्रावधान किए गए हैं। BNS की धारा 353 के अंतर्गत यदि कोई व्यक्ति जनता में शरारत या अफवाह फैलाता है, धारा 196 और 197 के तहत राष्ट्रीय एकता और अखंडता को नुकसान पहुंचाता है, या धारा 356 के तहत मानहानि करता है, तो यह गंभीर अपराध माना जाता है। दोषी पाए जाने पर 3 वर्ष तक की जेल, भारी जुर्माना अथवा दोनों सजा हो सकती है। इन प्रावधानों का मुख्य उद्देश्य देश की सुरक्षा, शांति और सामाजिक सौहार्द बनाए रखना है। इसलिए बिना पुष्टि कोई भी जानकारी साझा करना कानूनी जोखिम भी उत्पन्न कर सकता है।

अतः यह स्पष्ट है कि फेक न्यूज केवल गलत सूचना नहीं बल्कि समाज, लोकतंत्र और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। डिजिटल युग में प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह सतर्क रहे, तथ्य जांचे और जिम्मेदारीपूर्वक सोशल मीडिया का उपयोग करे। जागरूकता, डिजिटल साक्षरता और जिम्मेदार व्यवहार ही फेक न्यूज के खिलाफ सबसे प्रभावी हथियार हैं।

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