लखनऊ। अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस 2026 के मौके पर सोमवार को लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर में इतिहास, संस्कृति और पुरातात्विक विरासत की खास झलक देखने को मिली। उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व निदेशालय और प्राचीन भारतीय इतिहास एवं पुरातत्व विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय के संयुक्त आयोजन में छायाचित्र प्रदर्शनी और व्याख्यान कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहां विद्यार्थियों ने प्रदेश की प्राचीन धरोहरों और ऐतिहासिक स्थलों को करीब से समझा। इस कार्यक्रम में युवाओं की बड़ी भागीदारी ने यह दिखाया कि नई पीढ़ी अब अपनी सांस्कृतिक विरासत को जानने और उससे जुड़ने में रुचि ले रही है। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि डॉ. एस. एन. कपूर ने किया।
पुरातात्विक धरोहरों से रूबरू हुए हजारों छात्र
कार्यक्रम में आयोजित प्रदर्शनी में लहुरादेवा, जाजमऊ, राजा नल का टीला और मल्हर जैसे महत्वपूर्ण उत्खनन स्थलों के साथ कर्दमेश्वर महादेव मंदिर, मेढक मंदिर और गंगोली शिवाला सहित कई राज्य संरक्षित स्मारकों के छायाचित्र प्रदर्शित किए गए। विद्यार्थियों ने इन तस्वीरों और जानकारियों को बड़े उत्साह के साथ देखा और प्रदेश की ऐतिहासिक विरासत के बारे में जानकारी हासिल की। कार्यक्रम में 2000 से अधिक विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया
हुलासखेड़ा भ्रमण बना छात्रों के लिए खास अनुभव
इसके अलावा उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व निदेशालय द्वारा हुलासखेड़ा उत्खनन स्थल पर 200 से अधिक विद्यार्थियों का शैक्षिक भ्रमण भी कराया गया। विद्यार्थियों को उत्खनन स्थल और निदेशालय की पिक्चर गैलरी दिखाई गई, जहां उन्हें पुरातत्व, ऐतिहासिक खोजों और विरासत संरक्षण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। विद्यार्थियों ने इसे सीखने और इतिहास को समझने का यादगार अनुभव बताया।
मुख्य अतिथि डॉ. एस. एन. कपूर ने कहा कि संग्रहालय केवल पुरानी वस्तुओं को सुरक्षित रखने का स्थान नहीं हैं, बल्कि समाज और नई पीढ़ी को इतिहास और संस्कृति से जोड़ने का मजबूत माध्यम हैं। उन्होंने युवाओं से भारतीय संस्कृति एवं पुरातात्विक विरासत के संरक्षण के प्रति जागरूक एवं संवेदनशील बनने का आह्वान किया। वहीं पुरातत्व निदेशालय की निदेशक रेनू द्विवेदी ने संग्रहालयों की शैक्षिक उपयोगिता और सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ाने में उनकी भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को अपनी विरासत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि, अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस की शुरुआत वर्ष 1977 में मॉस्को में आयोजित आईकॉम की आम सभा के दौरान हुई थी। इसका उद्देश्य लोगों को संग्रहालयों और सांस्कृतिक विरासत के महत्व के प्रति जागरूक करना है। इस साल दुनिया भर में ‘एक विभाजित विश्व को एकजुट करने वाले संग्रहालय’ विषय के तहत यह दिवस मनाया जा रहा है। आज 150 से अधिक देशों के 37 हजार से ज्यादा संग्रहालय इस आयोजन में भाग लेते हैं और हर साल लाखों लोग इन कार्यक्रमों से जुड़कर इतिहास, कला और संस्कृति को करीब से समझते हैं।
