- वीरों की धरती बुंदेलखंड में पर्यटन की नई उड़ान, महोबा का गोरखगिरि बनने जा रहा ‘स्पिरिचुअल हॉटस्पॉट’
- 11.21 करोड़ रुपए की लागत से विकसित गोरखगिरि परियोजना, महोबा पर्यटन मानचित्र पर उभरने को तैयार
- गुरु गोरखनाथ की तपोस्थली गोरखगिरि, भगवान श्रीराम और वनवास से भी जुड़ी हैं मान्यताएं
- गुरु गोरखनाथ की तपोस्थली गोरखगिरि बनेगी वैश्विक आकर्षण का केंद्र- जयवीर सिंह
- ‘विकास भी, विरासत भी’ का सशक्त उदाहरण बनी गोरखगिरि परियोजना- जयवीर सिंह
लखनऊ/महोबा/गोरखपुर। उत्तर प्रदेश में आध्यात्मिक पर्यटन को नई रफ्तार देने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार लगातार काम कर रही है। इसी कड़ी में गुरु गोरखनाथ से जुड़े स्थलों को जोड़कर एक बड़ा पर्यटन सर्किट विकसित किया जा रहा है, जिसमें बुंदेलखंड के महोबा स्थित गोरखगिरि पर्वत अब प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है। ‘स्वदेश दर्शन 2.0’ योजना के तहत करीब 11.21 करोड़ रुपए की लागत से यहां पर्यटन विकास कार्य पूरा हो चुका है, जिससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी। साथ ही, क्षेत्र में पर्यटन को नई गति मिलने की संभावना है।

पर्यटन मंत्री ने बताया कि ‘विकास भी, विरासत भी’ के मूल मंत्र को साकार करते हुए बुंदेलखंड के महोबा में स्थित गोरखगिरि अब आध्यात्मिक पर्यटन का नया हॉटस्पॉट बनने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में तैयार यह परियोजना न सिर्फ श्रद्धालुओं को आधुनिक सुविधाएं देगी, बल्कि गुरु गोरखनाथ से जुड़े इस पवित्र स्थल की समृद्ध विरासत को संरक्षित करते हुए उसे वैश्विक पहचान भी दिलाएगी। पर्यटन मंत्री के मुताबिक, साल 2025 में ही महोबा में करीब 28 लाख पर्यटक पहुंचे, जो इस क्षेत्र की बढ़ती लोकप्रियता और संतुलित विकास का बड़ा प्रमाण है।
शिव तांडव मंदिर और गोरखगिरि मंदिर का कायाकल्प
महोबा के गोरखगिरि में पर्यटन का नया अध्याय लिखा गया है। पर्यटन परियोजना के तहत शिव तांडव मंदिर और गोरखगिरि मंदिर का कायाकल्प किया गया। पर्यटक सुविधाओं का विशेष ध्यान रखते हुए आधुनिक शौचालय, पर्यटक सुविधा केंद्र और स्थानीय लोगों को रोजगार से जोड़ने के लिए वेंडर कियोस्क भी विकसित किया गया है। आगंतुकों की आध्यात्मिक शांति के लिए ध्यान केंद्र और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए ओपन थिएटर इस स्थल की खास पहचान बनेंगे। आकर्षक मुख्य प्रवेश द्वार के साथ भीतर और बाहरी मार्गों का सुव्यवस्थित निर्माण कर पूरे परिसर में आवागमन को आसान और सुगम बनाया गया है।
रोजी-रोजगार और अर्थव्यवस्था को बूस्ट
गोरखगिरि परियोजना सिर्फ पर्यटन को बढ़ावा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बुंदेलखंड की स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान करेगी। परियोजना अंतर्गत वेंडर कियोस्क एवं अन्य गतिविधियों के जरिए स्थानीय कारीगरों और छोटे व्यवसायियों को अपने उत्पाद बेचने का मंच मिलेगा। इससे उनकी आय बढ़ेगी। साथ ही, पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही से क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। इस परियोजना से बुंदेलखंड के आर्थिक विकास को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
भगवान श्रीराम और गुरु गोरखनाथ से जुड़ी मान्यताएं
गोरखगिरि पर्वत स्थानीय परंपराओं में गहरे आध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्व का केंद्र रहा है। मान्यता है कि त्रेता युग में वनवास के दौरान प्रभु श्रीराम, जानकी और लक्ष्मण के साथ महोबा स्थित गोरखगिरि पर्वत पर काफी समय तक रुके थे। कालांतर में यह पर्वत गुरु गोरखनाथ की तपोस्थली के रूप में प्रसिद्ध हुआ। गुरु गोरखनाथ, नाथ संप्रदाय के महान संत के रूप में प्रतिष्ठित हैं।
बुंदेली संस्कृति के वाहक बनेंगे- अपर मुख्य सचिव
अपर मुख्य सचिव, पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग अमृत अभिजात ने बताया कि ‘गोरखगिरि परियोजना प्रदेश सरकार की दूरदर्शी सोच को दर्शाती है। उनके मुताबिक यह पहल न सिर्फ आध्यात्मिक विरासत को सहेज रही है, बल्कि पर्यटन को भी नई दिशा दे रही है। बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक सुविधाओं के जरिए खासकर बुंदेलखंड जैसे क्षेत्र को विशिष्ट पहचान मिल रही है, जो आगे चलकर वैश्विक स्तर पर बुंदेली संस्कृति के वाहक बनेंगे।’
