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मजबूत वैश्विक भागीदारी और स्वच्छ ऊर्जा के स्पष्ट रोडमैप के साथ शिखर सम्मेलन का सफल समापन

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डेस्क। भारत विद्युत शिखर सम्मेलन (बीईएस) के पहले संस्करण का आज सफलतापूर्वक समापन हुआ, जिसमें नीति निर्माताओं, वैश्विक विशेषज्ञों, उद्योगपतियों, निवेशकों एवं नवप्रवर्तकों को विद्युत क्षेत्र के भविष्य पर विचार-विमर्श करने तथा वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को गति प्रदान करने के लिए एक मंच पर लाया गया। सम्मेलन में व्यापक चर्चा, उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बातचीत और महत्वपूर्ण व्यापारिक संपर्क दिखाई दिया, जिससे वैश्विक ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र में भारत की नेतृत्व क्षमता को मजबूती मिली। इस शिखर सम्मेलन को असाधारण प्रतिक्रिया प्राप्त हुई, जिसमें 35,000 से अधिक प्रदर्शनी प्रतिभागी, 28 राज्य/केंद्र शासित प्रदेश, 80 से अधिक स्टार्टअप सहित 200 से अधिक प्रदर्शनी कंपनियां, 6,000 से अधिक प्रतिनिधि, 300 से अधिक वक्ता और 100 से अधिक सम्मेलन सत्र शामिल थे, जो इसके स्तर एवं वैश्विक महत्व को दर्शाते हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण से प्रेरणा लेते हुए, भारत 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता प्राप्त करने की दिशा में तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है और पहले ही 50 प्रतिशत से अधिक गैर-जीवाश्म क्षमता का महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर चुका है। ‘एक सूर्य, एक विश्व, एक ग्रिड’ जैसी पहलें वैश्विक ऊर्जा सहयोग के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को और भी ज्यादा स्पष्ट करती हैं। अपने समापन भाषण में, केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि शिखर सम्मेलन बहुत सफल रहा और इसमें विद्युत क्षेत्र के विभिन्न हितधारकों की प्रभावशाली भागीदारी देखी गई। पहला विद्युत शिखर सम्मेलन होने के बावजूद, इसमें अभूतपूर्व भागीदारी एवं सार्थक चर्चाएं देखने को मिलीं। उन्होंने कहा कि वह विशेष रूप से शिखर सम्मेलन में स्टार्टअप्स की भागीदारी और इस क्षेत्र में उनके द्वारा लाए गए नवाचारों से बहुत प्रसन्न हैं।

उन्होंने कहा कि भारत के पास 2047 तक विकसित भारत के लिए एक दृष्टिकोण है और इस दृष्टिकोण की प्राप्ति के लिए, विद्युत एक सामान्य संसाधन है जिसकी आवश्यकता सभी आर्थिक हितधारकों एवं नागरिकों को है। उन्होंने कहा कि ‘सौभाग्य योजना’ के अंतर्गत हम इसमें सफल रहे कि देश के हर कोने तक विद्युत पहुंच गई। सौर ऊर्जा और देशों के बीच सहयोग के महत्व पर बल देते हुए, मनोहर लाल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शब्दों का उल्लेख किया जो ‘एक सूर्य, एक विश्व, एक ग्रिड’ है। उन्होंने कहा कि ये शब्द दर्शाते हैं कि हमें एक वैश्विक परिवार के रूप में एक साथ मिलकर काम करने की आवश्यकता है। हमारा ध्यान स्थिरता पर होना चाहिए और इसलिए नवीनीकरणीय ऊर्जा सहित सौर ऊर्जा का विस्तार बहुत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि शिखर सम्मेलन के दौरान कई देशों और विशेष रूप से अफ्रीकी देशों के साथ सार्थक चर्चाएं हुई। इससे स्पष्ट रूप से यह बात सामने आई कि भारत और अफ्रीकी देशों के बीच विद्युत क्षेत्र और अन्य क्षेत्रों में सहयोग की पारस्परिक रूप से लाभकारी संभावना मौजूद हैं। खट्टर ने कहा कि विभिन्न कार्यों एवं सुधारों के माध्यम से डिस्कॉम को मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने जानकारी दी कि शिखर सम्मेलन के दौरान डिस्कॉम ने अपने संचालन एवं वित्तीय स्थिति में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाने की प्रबल इच्छा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में प्रस्तावित सुधारों में स्मार्ट मीटरों को अपनाना और लागत के अनुरूप टैरिफ लागू करना शामिल है। केंद्रीय विद्युत मंत्री ने यह भी घोषणा किया कि बीईएस का अगला संस्करण 2028 में गांधीनगर, गुजरात में आयोजित किया जाएगा।
समापन सत्र को संबोधित करते हुए,केंद्रीय विद्युत एवं एमएनआरई राज्य मंत्री श्रीपाद नाइक ने कहा कि शिखर सम्मेलन में हमारी चर्चाओं से जो बात सबसे स्पष्ट रूप से सामने आयी है वह यह है कि भारत का विद्युत क्षेत्र केवल विस्तार ही नहीं कर रहा है बल्कि यह एक गहन समन्वित संघीय संरचना के माध्यम से आगे बढ़ रहा है, जहां राष्ट्रीय दृष्टिकोण और राज्य के नेतृत्व में कार्यान्वयन निर्बाध रूप से संरेखित हैं। श्रीपाद नाइक ने कहा कि इस शिखर सम्मेलन से तीन प्रमुख अंतर्दृष्टियां उभरकर सामने आयी हैं। पहला, राज्य नवाचार के इंजन के रूप में उभर रहे हैं, जो नवीकरणीय विस्तार एवं नीति विकास को आकार दे रहे हैं। दूसरा, वितरण सुधार ठोस गति प्राप्त कर रहे हैं, विश्वसनीय विद्युत वितरण के अंतिम छोड़ को मजबूत कर रहे हैं। तीसरा, हमारा परिवर्तन एकीकृत एवं प्रणाली-संचालित हो रहा है, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा, भंडारण, पारेषण और डिजिटल तकनीकें एक समेकित पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में विकसित हो रही हैं।

सभा को संबोधित करते हुए, पंकज अग्रवाल, सचिव (विद्युत) ने कहा कि उद्योग निकायों के साथ हुई चर्चाओं से यह संकेत मिलता है कि विद्युत क्षेत्र में निर्माताओं द्वारा लगभग 32,000 करोड़ रुपये की पूंजीगत व्यय योजना है। उन्होंने वहनीयता सुनिश्चित करने के लिए विद्युत लागत के प्रणाली-स्तरीय मूल्यांकन की आवश्यकता पर बल दिया और नवीकरणीय ऊर्जा के प्रभावी एकीकरण के लिए ऊर्जा भंडारण क्षमताओं को तीव्र गति से बढ़ाने की तात्कालीन आवश्यकता को रेखांकित किया। पीयूष सिंह, अपर सचिव, बागवानी मंत्रालय, ने शिखर सम्मेलन के स्तर एवं सफलता को स्वीकार किया और इसके सुचारू संचालन के लिए आयोजकों की सराहना की।
इस अवसर पर तीन रिपोर्टें जारी की गईं। जिनमें पावर फाउंडेशन ऑफ इंडिया द्वारा राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के नियामक प्रदर्शन का रेटिंग 2025; केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण द्वारा 2024-25 के लिए कोयला/लिग्नाइट आधारित ग्रिड से जुड़े थर्मल पावर स्टेशनों में राख उत्पादन एवं उपयोग; और ऊर्जा, पर्यावरण एवं जल परिषद द्वारा भारत में सोडियम-आयन बैटरी पारिस्थितिकी तंत्र की स्थापना, घटक निर्माण को मजबूत करने के लिए नई प्रौद्योगिकियों का लाभ उठाना शामिल हैं।

शिखर सम्मेलन की मुख्य बातें

भारत का विद्युत क्षेत्र अभूतपूर्व वृद्धि एवं परिवर्तन प्रदर्शित कर रहा है:

  • स्थापित क्षमता 520 गीगावाट से अधिक हो चुकी है जो वैश्विक स्तर पर सबसे तीव्र गति से विस्तार करने वाले देशों में से एक है।
  • पारेषण नेटवर्क का विस्तार 5 लाख सर्किट किलोमीटर से अधिक हो चुका है।
  • नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिसमें सौर ऊर्जा क्षमता 2014 में 2.8 गीगावाट से बढ़कर वर्तमान में 143 गीगावाट से अधिक हो चुकी है।
  • अनुमान है कि एआई-सक्षम डेटा केंद्र एवं इलेक्ट्रिक मोबिलिटी जैसे उभरते क्षेत्रों के कारण विद्युत की मांग में 2030 तक 30 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि होगी।

विद्युत मंत्री ने इस बात पर बल दिया कि यद्यपि ग्रिड की स्थिरता के लिए तापीय ऊर्जा महत्वपूर्ण बनी हुई है, वहीं भंडारण, ग्रिड आधुनिकीकरण एवं नीतिगत सुधारों के समर्थन से नवीकरणीय ऊर्जा दीर्घकालिक स्थिरता को बढ़ावा देगी।

राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मंत्रिस्तरीय बैठक

केंद्रीय विद्युत मंत्री की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय मंत्रिस्तरीय बैठक हुई जिसके परिणामस्वरूप निम्नलिखित प्राथमिकता वाले कार्य क्षेत्रों की पहचान की गई:

  • संरचनात्मक एवं परिचालन सुधारों के माध्यम से डिस्कॉम की वित्तीय व्यवहार्यता को मजबूत करना।
  • लक्षित सब्सिडी के साथ लागत के अनुरूप टैरिफ सुनिश्चित करना।
  • पूरे देश में स्मार्ट मीटरिंग के कार्यान्वयन में तेजी लाना।
  • भविष्य की मांग के मद्देनजर पर्याप्त उत्पादन क्षमता संबंधी समझौता सुनिश्चित करना।
  • दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा लक्ष्यों को पूरा करने के लिए परमाणु ऊर्जा विकास को बढ़ावा देना।

रणनीतिक सत्र – मुख्य निष्कर्ष

कई रणनीतिक सत्रों में भविष्य के विद्युत परिदृश्य को आकार देने वाले महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई:

  • केंद्र-राज्य समन्वय: नीतिगत सामंजस्य एवं परियोजनाओं के त्वरित क्रियान्वयन पर ध्यान केंद्रीत।
  • हरित हाइड्रोजन एवं उभरते ईंधन: भारत को हरित औद्योगिक ईंधनों के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना।
  • एआई-संचालित विद्युत प्रणालियां: ग्रिड इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा एवं परिचालन दक्षता में सुधार।
  • परमाणु ऊर्जा: विश्वसनीय, स्वच्छ आधारभूत क्षमता का विस्तार।
  • विद्युतीकरण एवं ऊर्जा बाजार: कुशल व्यापार प्रणालियों के माध्यम से कम कार्बन उत्सर्जन वाले विकास को सक्षम बनाना।
  • क्षेत्रीय विकास का वित्तपोषण: बैंकिंग जैसी संरचनाओं के माध्यम से खरबों डॉलर के निवेश को जुटाना।
  • ऊर्जा भंडारण: भंडारण आवश्यकताओं में तीव्र वृद्धि को संबोधित करना (2031-32 तक लगभत 5 गुना बढ़ने की उम्मीद)
  • विश्व के लिए मेक इन इंडिया: वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए घरेलू विनिर्माण को मजबूत बनाना।

चर्चाओं में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि भारत के दीर्घकालिक ऊर्जा परिवर्तन के लिए 2070 तक 22 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक के निवेश की आवश्यकता हो सकती है, जिसमें उत्पादन, पारेषण, भंडारण एवं डिजिटल अवसंरचना में महत्वपूर्ण अवसर मौजूद हैं।

अवसंरचनाभंडारण एवं बाजार विकास

  • भारत को 2030 तक 1.37 लाख सर्किट किलोमीटर से अधिक ट्रांसमिशन लाइनें जोड़ने की आवश्यकता है, जिसके लिए लगभग 9 लाख करोड़ रुपये के निवेश की आवश्यकता होगी।
  • ऊर्जा भंडारण की आवश्यकताओं में तीव्र गति से बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद है, जिसमें पंप स्टोरेज की क्षमता 200 गीगावाट से अधिक है।
  • बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीईएसएस) चरम मांग को प्रबंधित करने के लिए एक प्रमुख समाधान के रूप में उभर रही है।
  • नवीकरणीय ऊर्जा के टैरिफ एवं बाजार तंत्र लगातार विकसित हो रहे हैं  जिससे दीर्घकालिक मूल्य निर्धारण एवं निवेशकों का विश्वास बढ़ रहा है।
  • भारतीय कार्बन बाजार पोर्टल का शुभारंभ हुआ है और जल्द ही व्यापार शुरू होने की उम्मीद है, जो जलवायु वित्त के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है।

डिजिटल परिवर्तन

डिजिटल परिवर्तन एक निर्णायक शक्ति के रूप में उभरा है, जिसमें विद्युत क्षेत्र भविष्यसूचक एवं बुद्धिमान ग्रिड संचालन की दिशा में आगे बढ़ने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग और डिजिटल ट्विन का तीव्रता से लाभ प्राप्त कर रहा है। डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना की सफलता से प्रेरित “इंडिया एनर्जी स्टैक” की अवधारणा का उद्देश्य निर्बाध, अंतरसंचालनीय ऊर्जा प्रणालियों का निर्माण करना है। स्मार्ट मीटरिंग और रूफटॉप सोलर जैसी पहलें उपभोक्ताओं को मुनाफा प्राप्तकर्ता बनने और ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र में सक्रिय रूप से हिस्सा लेने के लिए सशक्त बना रही हैं।

राज्य स्तरीय नेतृत्व एवं पहल

राज्यों ने महत्वाकांक्षी कार्ययोजनाओं का प्रदर्शन किया:

  • गुजरात: नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य 2047 तक 190 गीगावाट
  • आंध्र प्रदेश: 6 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा निवेश वाला एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा केंद्र।
  • महाराष्ट्र: बड़े पैमाने पर क्षमता विस्तार के साथ 2030 तक मांग 280 किलोवाट घंटे तक पहुंचने का अनुमान।
  • बिहार: सुनियोजित निवेश योजनाओं के माध्यम से भंडारण एवं ग्रिड अवसंरचना को बढ़ावा देना।
  • दिल्ली: नवीकरणीय ऊर्जा पर आधारितभंडारण-एकीकृत शहरी विद्युत प्रणाली की ओर परिवर्तन।

वैश्विक सहयोग एवं द्विपक्षीय प्रतिबद्धताएं

इस शिखर सम्मेलन ने मलावी, ताजिकिस्तान, मॉरीशस, किर्गिस्तान और रूस सहित अन्य देशों के साथ-साथ अफ्रीका50 और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों जैसे उद्योग हितधारकों के साथ कई उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठकें आयोजित करने की सुविधा प्रदान की।

ये गतिविधियां निम्नलिखित पर केंद्रित थीं:

  • सीमा पार विद्युत व्यापार।
  • नवीकरणीय ऊर्जा सहयोग।
  • ट्रांसमिशन अवसंरचना विकास।
  • क्षमता निर्माण एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण।

भारत-अफ्रीका रणनीतिक बैठक ने नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार, ग्रिड आधुनिकीकरण एवं संपूर्ण महाद्वीप में अंतिम-मील संपर्क पर ध्यान केंद्रित करते हुए साझेदारियों को और मजबूत किया।

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