केजीएमयू की कुलपति डा0 सोनिया नित्यानन्द ने दी बधाई और खर्राटे व निद्रा सम्बन्धी रोगियों के उपचार के लिए बताया एक बड़ा कदम
लखनऊ। खर्राटे एवं निद्रा संबंधी रोग देश-दुनिया में काफी बड़ी समस्या हैं। हमारे देश में 40 प्रतिशत वयस्क पुरुष, 20 प्रतिशत वयस्क महिलाएं तथा 10 प्रतिशत बच्चों को खर्राटे आते हैं। देश में लगभग 10 करोड़ से ज्यादा लोग खर्राटों के कारण होने वाली ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया (ओएसए) से पीड़ित हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए आज इसके संबंध में एक संस्था स्नोरिंग एण्ड स्लीप रिलेटेड डिसऑर्डर्स सोसाइटी की स्थापना की गयी है, जिसका विधिवत रजिस्ट्रेशन भी करवा लिया गया है। इस संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय, लखनऊ के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डा० सूर्यकान्त को चुना गया। राष्ट्रीय सचिव के रूप में हिन्दी मेडिकल साइंसेस, अयोध्या रोड, बाराबंकी की डा० श्वेता कंचन को चुना गया तथा केजीएमयू, लखनऊ के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग की डा० ज्योति बाजपेई को उपाध्यक्ष एवं डा० अंकित कुमार को कोषाध्यक्ष के पद पर चुना गया।
केजीएमयू की कुलपति डा० सोनिया नित्यानन्द ने डा० सूर्यकान्त व उनकी टीम को बधाई देते हुए कहा कि खर्राटे एवं निद्रा संबंधी रोगों के लिए सोसाइटी का गठन एक दूरदर्शी और सराहनीय पहल है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल इन रोगों के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ेगी, बल्कि आधुनिक जांच एवं उपचार की सुविधाओं के विस्तार में भी मदद मिलेगी। कुलपति ने विश्वास व्यक्त किया कि डा० सूर्यकान्त के नेतृत्व में यह पहल देशभर में स्लीप मेडिसिन के क्षेत्र में शोध, प्रशिक्षण और जनजागरूकता को नई दिशा प्रदान करेगी।
डा० सूर्यकान्त ने बताया कि इस संस्था का उद्देश्य देशभर से स्लीप मेडिसिन के विशेषज्ञों एवं चिकित्सकों को जोड़ना है। खर्राटों (स्नोरिंग), ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया (ओएसए), स्लीप स्टडी, सी-पैप (सीपीएपी) उपचार एवं विभिन्न पीएपी उपकरणों के उपयोग तथा स्लीप डिसऑर्डर्स के आधुनिक प्रबंधन के बारे में विस्तृत जानकारी, शिक्षण एवं प्रशिक्षण पर जोर दिया जाएगा, जिससे खर्राटे एवं निद्रा रोग से ग्रसित लोगों के उपचार तथा इसके दुष्प्रभावों के बारे में आम जनमानस को जागरूक एवं उपचार में लाभ प्रदान किया जा सके। डा० सूर्यकान्त ने विश्व निद्रा दिवस के अवसर पर विभाग में आयोजित जनजागरूकता कार्यक्रम के दौरान सभी विभागों के चिकित्सकों, रेजिडेंट्स, नर्सिंग स्टाफ, हेल्थ वर्कर्स, भर्ती एवं ओपीडी मरीजों तथा उनके तीमारदारों को जानकारी देते हुए कहा कि खर्राटों को लोग कोई स्वास्थ्य समस्या नहीं मानते हैं। लोगों को लगता है कि खर्राटे लेकर सोने वाला व्यक्ति बहुत बढ़िया और चैन की नींद सो रहा है, जबकि खर्राटे हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत खतरनाक होते हैं। इनका खतरा मोटापे से पीड़ित लोगों में, जिनकी गर्दन छोटी होती है एवं जिनकी शर्ट का साइज 42 से ज्यादा होता है, उनमें अधिक होता है।
डा० सूर्यकान्त ने बताया कि खर्राटे लेने वालों को रात भर अच्छी नींद नहीं आती है और उनकी नींद बीच-बीच में खुलती रहती है। साथ ही शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा भी कम हो जाती है, जिससे शरीर के हर अंग को नुकसान पहुँचता है। खर्राटों के कारण ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया (ओएसए), बीपी, हार्ट अटैक, डायबिटीज, फालिज जैसी कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। डा० सूर्यकान्त ने सभी गाड़ी चलाने वालों को यह सलाह दी है कि यदि उन्हें खर्राटे आते हैं, तो उन्हें इसकी जांच अवश्य करानी चाहिए। अन्यथा रात में नींद पूरी न होने के कारण ऐसे लोगों को दिन में बहुत नींद आती है, जिससे उनका एक्सीडेंट भी हो सकता है। दुनिया में लाखों लोगों के रोड एक्सीडेंट खर्राटों की समस्या के कारण ही होते हैं। उन्होंने कहा कि खर्राटे एवं निद्रा रोग से पीड़ित लोगों की जांच एवं उपचार की व्यवस्था केजीएमयू के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग में उपलब्ध है। इस अवसर पर विभाग के चिकित्सक डा० एस. के. वर्मा, डा० संतोष कुमार, डा० आनन्द श्रीवास्तव, रेजिडेन्ट व स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे। इस अवसर पर रोगियों के परिजनों को बताया गया कि खर्राटे एवं ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया का प्रमुख कारण मोटापा है, जो कि हरी सब्जियां, फल तथा व्यायाम से कम किया जा सकता है।
