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डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि स्वतंत्रता के 100 वर्षों में युवा भारत को आकार देंगे

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डेस्क। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान, प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत निवारण, पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि 2014 में “कमजोर पांच” अर्थव्यवस्थाओं में गिने जाने से लेकर विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभरने तक भारत की यात्रा राष्ट्रीय आत्मविश्वास, क्षमता और दिशा में निर्णायक बदलाव को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि भारत निकट भविष्य में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने और 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य प्राप्त करने की दिशा में दृढ़ता से अग्रसर है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने तिरुवनंतपुरम के कौडियार में “विकसित भारत @2047: राष्ट्रीय परिवर्तन के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी और भविष्य के लिए तैयार नवाचार” विषय पर पी. परमेश्वरन स्मृति व्याख्यान देते हुए इस अवसर को सौभाग्यपूर्ण बताया क्योंकि यह व्याख्यान राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के साथ ही आयोजित किया गया था। यह कार्यक्रम प्रख्यात विचारक, विचारधारावादी और सामाजिक नेता श्री पी. परमेश्वरन की स्मृति में “भारतीय विचार केंद्रम” द्वारा आयोजित किया गया था।
भारत की सभ्यतागत यात्रा पर विचार करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत एक प्राचीन सभ्यता है जिसने आक्रमणों, औपनिवेशिक शासन और व्यवस्थित शोषण का सामना किया है लेकिन फिर भी नए आत्मविश्वास के साथ और अधिक मजबूत होकर उभरी है। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में लोकतंत्र की वास्तविक भावना और भी गहरी हुई है, जिससे सबसे वंचित नागरिक भी बिना किसी बाधा के आकांक्षाएं रखने के लिए सशक्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र तभी सार्थक होता है जब सबसे गरीब परिवार की एक मां भी यह सपना देख सके कि उसका बच्चा वैज्ञानिक, डॉक्टर या सरकारी कर्मचारी बन सकता है, और यह विश्वास कर सके कि व्यवस्था उस सपने को साकार करने में मदद करेगी।नवाचार के क्षेत्र में उन्होंने कहा कि 2014 में भारत वैश्विक नवाचार सूचकांक में 81वें स्थान पर था और अब 38वें स्थान पर पहुंच गया है। देश में अब दो लाख से अधिक स्टार्टअप हैं जो 21 लाख से अधिक रोजगार सृजित कर रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि जब 2015 में “स्टार्ट अप इंडिया” की घोषणा की गई थी तब यह अवधारणा कई लोगों के लिए अपरिचित थी लेकिन आज यह एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन में बदल गया है। इन स्टार्टअपों में से लगभग आधे श्रेणी-2 और श्रेणी-3 शहरों से उभर रहे हैं, और इनमें से एक महत्वपूर्ण हिस्सा महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यम हैं।

उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण पर पारंपरिक चर्चा में बदलाव आ रहा है, क्योंकि महिला वैज्ञानिक और नवप्रवर्तक अंतरिक्ष, विज्ञान और शासन के क्षेत्र में देश के कुछ सबसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय अभियानों का नेतृत्व कर रही हैं। डॉ. जितेंद्र सिंह ने शोध परिणामों पर कहा कि पेटेंट दाखिल करने के मामले में भारत वैश्विक स्तर पर छठे स्थान पर है जिनमें से 60 प्रतिशत से अधिक पेटेंट देश में रहने वाले लोगों द्वारा दाखिल किए गए हैं। वैज्ञानिक प्रकाशनों के मामले में भी देश अग्रणी देशों में से एक है, जहां उच्च स्तर पर उद्धृत शोध पत्रों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हजारों भारतीय वैज्ञानिक वैश्विक स्तर पर शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों में शामिल हैं जो भारतीय वैज्ञानिक प्रतिभा की वैश्विक मान्यता को दर्शाता है। केन्‍द्रीय राज्‍य मंत्री ने अंतरिक्ष और परमाणु क्षेत्रों का उल्‍लेख करते हुए कहा कि नीतिगत सुधारों ने निजी भागीदारी के नए रास्ते खोल दिए हैं जिसके परिणामस्वरूप भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में तीव्र विस्तार हुआ है। रक्षा और उन्नत प्रौद्योगिकियों में स्वदेशी क्षमताओं में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसके अलावा निर्यात और आत्मनिर्भरता में भी वृद्धि हुई है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने महासागर मिशन का जिक्र करते हुए कहा कि भारत की स्थिति अद्वितीय है क्योंकि यह एकमात्र ऐसा देश है जिसके नाम पर एक महासागर का नाम रखा गया है। उन्होंने कहा कि समुद्री संसाधनों, गहरे समुद्र के खनिजों और जैव विविधता की खोज राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में भविष्य में मूल्यवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, अटल नवाचार मिशन, पीएम मुद्रा योजना, पीएम विश्वकर्मा योजना और पीएम स्वनिधि जैसी नीतिगत पहलों के बारे में भी बात की, जो पारंपरिक सरकारी रोजगार से परे अवसरों का विस्तार कर रही हैं। उन्होंने कहा कि ये उपाय उद्यमिता को प्रोत्साहित कर रहे हैं, पारंपरिक कारीगरों का समर्थन कर रहे हैं और स्ट्रीट वेंडर्स और छोटे उद्यमियों को सम्मान और आर्थिक स्थिरता प्राप्त करने में सक्षम बना रहे हैं। डॉ. जितेंद्र सिंह ने इसे “भारत में रहने का सबसे अच्छा समय” बताते हुए विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे युवाओं सहित सभी भारतीयों से देश की विकास गाथा से जुड़े रहने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक अनुभवों के मूल्यवान होते हुए भी भारत आज अनुसंधान, नवाचार और उद्यम के क्षेत्र में अभूतपूर्व अवसर प्रदान करता है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने अपने संबोधन के समापन में कहा कि 2047 में विकसित भारत का स्वरूप आज के युवाओं द्वारा निर्धारित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान पीढ़ी की जिम्मेदारी क्षमता निर्माण, संस्थानों को सुदृढ़ करने और एक अनुकूल वातावरण बनाने की है ताकि जब भारत स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करे तो वह एक पूर्ण विकसित, नवाचार-प्रेरित और विश्व स्तर पर सम्मानित राष्ट्र के रूप में हो।

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