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प्रदेश में मछली में विकास दर 115.5 प्रतिशत

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मत्स्य विभाग द्वारा आज यहां इंदिरागांधी प्रतिष्ठान में पहली बार दो दिवसीय मीन महोत्सव (एक्वा एक्सपो) का शुभारम्भ भारत सरकार के केन्द्रीय राज्यमंत्री मत्स्य पालन, पशुपालन, डेयरी और पंचायतीराज प्रो0 एस0पी0 सिंह बघेल एवं उ0प्र0 के मत्स्य विकास विभाग के कैबिनेट मंत्री डॉ0 संजय कुमार निषाद द्वारा किया गया। एक्सपो में देश एवं प्रदेश के प्रसिद्ध वैज्ञानिक, उद्यमी तथा प्रदेश के विभिन्न जनपदों से लगभग 1000 मत्स्य पालक सम्मिलित हुए। 50 प्रतिष्ठित कंपनियों द्वारा औद्योगिक प्रदर्शनी एवं स्टॉल लगाये गये। बैनर, पोस्टर, स्टैण्डी, हैण्ड बिल्स, साहित्य, ब्रोशर, पैम्प्लेटस, एल.सी.डी. प्रोजेक्टर, पावर प्वाइंट प्रजेन्टेशन वेबकास्टिंग/यूट्यूब चैनल आदि द्वारा उ.प्र. के समस्त 75 जनपदों में मत्स्य पालकों एवं मत्स्य उद्यमियों हेतु कार्यक्रम का सीधा प्रसारण किया गया। विभिन्न प्रकार के मत्स्य व्यंजनों का फिश फूड कोर्ट एवं प्रोटीन जागरूकता कार्यक्रम चलाया गया।
इस अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केन्द्रीय राज्यमंत्री प्रो0 एस0पी0 सिंह बघेल ने कहा कि देश को आर्थिक रूप से सम्पन्न व समृद्ध बनाने के लिए किसानों की स्थिति में सुधार के लिए प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केन्द्र सरकार कार्य कर रही, जिसका लाभ किसानों को मिल रहा। उन्हांेने कहा कि किसानों की आय में वृद्धि, उन्नत पशुपालन एवं उन्नत मत्स्य पालन से ही सम्भव है। मंत्री जी द्वारा कृषि दर पर मत्स्य पालकों को बिजली की आपूर्ति एवं उ.प्र. में एन.एफ.डी.बी के सेन्टर खोलने की दिशा में कार्य करने हेतु कहा गया। पशुपालन, डेयरी और मत्स्य योजनाओं के माध्यम से किसानों की आय निश्चित रूप से दोगुनी हो सकती है। उन्होंने इस आयोजन के लिए उ0प्र0 सरकार को धन्यवाद देते हुए कहा कि इस एक्सपो से मत्स्य क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के प्रसार, उद्यमिता संवर्द्धन तथा मत्स्य पालकों की आय में वृद्धि हेतु समन्वित मंच उपलब्ध हो रहा है, जिससे जमीनी समस्याओं के समाधान वैज्ञानिक एवं नवीन तकनीकी नवाचारों को व्यवहारिक रूप से समझने, मत्स्य पालन को अधिक लाभकारी बनाने और एक्वा पर्यटन को बढ़ावा देने पर बल मिलेगा।
प्रदेश के मत्स्य मंत्री डा. संजय कुमार निषाद ने कहा कि योगी आदित्यनाथ के कुशल मार्गदर्शन व प्रभावी नेतृत्व में प्रदेश सरकार और राज्य के मत्स्य पालकों के प्रयासों से मत्स्य पालन में उत्तर प्रदेश भारत का तीसरा सबसे बड़ा मत्स्य उत्पादक राज्य बन गया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में मछली में विकास दर 115.5 प्रतिशत है। राज्य का वार्षिक मत्स्य उत्पादन गत 06 वर्षों में दोगुना होकर 13.3 लाख मीट्रिक टन हुआ है। अमृत सरोवरों को मछली पालन योग्य बनाने, तालाबों के पट्टे समय से दिलाने तथा मत्स्य पालन में विज्ञान एवं तकनीकी के उपयोग पर विशेष बल दिया जा रहा है। अनुदान के साथ-साथ तकनीकी ज्ञान देकर मत्स्य पालकों के विकास एवं सशक्तीकरण तथा उ.प्र. में एन.एफ.डी.बी के सेन्टर खोलने की दिशा में कार्य करने हेतु कहा गया। सरकार के प्रयासों से विजन-2047 में उ.प्र. अंतर्देशीय मत्स्य पालन में प्रथम राज्य बन जायेगा। मा0 मुख्यमंत्री जी द्वारा वर्ष 2026-27 के बजट में मत्स्य विभाग के लिए पहली बार बड़े उपहार की सौगात दी गयी है। मत्स्य पालन से जुड़े किसानों की आय वृद्धि हेतु कुल 114.20 करोड़ की राज्य सहायतित नई मांग के रूप में स्वीकृत की गयी है। प्रदेश में पहली बार मीन महोत्सव-2026 (एक्वा एक्सपो 2026) का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें राज्य एवं राज्य के बाहर से मत्स्य उद्यमी, निवेशक के साथ-साथ वैज्ञानिक, प्रोफेसर, विशेषज्ञ, राज्य एवं केन्द्र सरकार के वरिष्ठ मंत्री, अधिकारीगण भी सम्मिलित हुए।
मंत्री ने कहा कि यह महोत्सव राज्य में मत्स्य पालन को औद्योगिक स्तर पर विकसित करने में मदद करेगा तथा प्रदेश के मत्स्य किसानों एवं मत्स्य उद्यमियों के लिए एक सशक्त मंच सिद्ध होगा। वैज्ञानिकों एवं उद्यमियों के साथ सीधा संवाद किसानों को नई तकनीकों से जोड़ने के साथ-साथ उनकी आय वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे प्रत्येक मत्स्य किसान एवं मत्स्य उद्यमी को तकनीकी ज्ञान, योजनाओं की जानकारी एवं बाजार से सीधा जुड़ाव होगा। साथ ही प्रदेश की जनता को व्यापार, एक्वा पर्यटन, पोषण सुरक्षा एवं रोजगार का लाभ मिलेगा।
अध्यक्ष उ.प्र. मत्स्य विकास निगम रमाकान्त निषाद द्वारा बताया गया कि नदियों से ब्रूडर लाकर निगम की हैचरियों में ब्रीडिंग कराकर गुणवत्तायुक्त मत्स्य बीज उपलब्ध कराया जा रहा है। वीरू साहनी सभापति उ.प्र. मत्स्य जीवी सहकारी संघ द्वारा समितियों के सदस्यों को प्रशिक्षण देकर क्षमता विकास करने पर जोर दिया गया।
मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी द्वारा बताया गया कि प्रदेश में पहली बार मीन महोत्सव के इस आयोजन में काफी अधिक संख्या में मत्स्य पालक किसान एवं विशेषज्ञ सम्मिलित हुए हैं। अच्छा बीज, फीड, तकनीक एवं उत्पादक को मार्केट से सीधे जोड़कर अगले 5 वर्षों में उ.प्र. मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में पश्चिम बंगाल को पीछे छोड़ सकता है।
मुख्यमंत्री के सलाहकार के0वी0 राजू ने कहा कि इस उत्सव से प्रदेश को मत्स्य पालन क्षेत्र में आधुनिक लाभकारी और आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी। राज्य सरकार द्वारा मत्स्य उत्पादन और मछुवारे के कल्याण के लिए लाभकारी योजनायें संचालित की जा रही है। मीन महोत्सव में आयोजित कार्यक्रमों के माध्यमों से उद्यमी एवं मछुवा समुदाय के लोग विशेष रूप से लाभान्वित होंगे।
अपर मुख्य सचिव मत्स्य मुकेश कुमार मेश्राम द्वारा बताया गया कि प्रदेश में 6 लाख से अधिक जलक्षेत्र उपलब्ध है। मत्स्य पालक, विशेषज्ञ, उद्यमी एवं निवेशक एक साथ चर्चा कर प्रसंस्करण तथा मूल्य संवर्धन के माध्यम से मत्स्य उत्पादन, उत्पादकता एवं किसानों की आय में वृद्धि कर सकते हैं। पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो-अनुसन्धान संस्थान (दुवासु) मथुरा में मत्स्य विज्ञान पर शोध कार्य प्रारम्भ हो गया है।
डा. दीपा सुमन, एन.एफ.डी.बी. द्वारा केन्द्र सरकार की योजनाओं प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना, प्रधानमंत्री किसान समृद्धि योजना तथा फिशरीज एवं एक्वाकल्चर डेवलपमेन्ट फन्ड की जानकारी दी गयी। महानिदेशक मत्स्य द्वारा बताया गया कि मत्स्य पालन, उत्तर प्रदेश की संस्कृति का अभिन्न अंग है एवं उसके साथ-साथ ग्रामीण आजीविका का मुख्य साधन है। उत्तर प्रदेश सरकार के प्रतीक चिन्ह में भी मत्स्य का चित्र है और साथ ही धनुष और तीर का भी चित्र है, जोकि प्रगति को दर्शाता है।
इसके तहत राज्य में इंटीग्रेटेड एक्वापार्क की स्थापना एवं 03 मत्स्य मण्डी स्थापित करने के लिए 100 करोड़ रूपये बजट का प्राविधान किया गया है। राज्य में मोती की खेती को बढावा देने के लिए 03 करोड़ रूपये बजट का प्राविधान किया गया है। साथ ही जनपद गोरखपुर में वर्ल्डफिश प्रोजेक्ट सेन्टर की स्थापना हेतु 06 करोड़ रूपये बजट का प्राविधान किया गया है। इस मीन महोत्सव-2026 के आयोजन करने का मुख्य उद्देश्य मत्स्य पालकों को नवीनतम पद्धति से परिचय, वैज्ञानिक तालाब प्रबन्धन एवं जैव सुरक्षा, बहुप्रजाती पालन-मार्गदर्शन, प्रति हैक्टेयर प्रोडक्टिविटी बढाने की तकनीक सम्बन्धित ज्ञानबर्धन करना है तथा उद्यमियों हेतु तेजी से बढ़ते क्षेत्र में प्रवेश, व्यापार के अवसर, हैचरी की स्थापना, मत्स्य चारा निर्माण, कोल्ड चेन और लाजिस्टिक एवं आर्नामेन्टल मछली पालन इत्यादि क्षेत्रों में निवेश को बढावा देना है।
आलोक बिसवाल (डेलॉयट) द्वारा प्रदेश की अर्थव्यवस्था को वन ट्रिलियन डालर बनाने में मत्स्य की भूमिका के विषय में प्रस्तुतिकरण किया गया तथा मछुआरों के कल्याण एवं मत्स्य विकास हेतु केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित सभी योजनाओं यथा प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना, केज कल्चर, मुख्यमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना, उ.प्र. मत्स्य पालक कल्याण कोष, के.सी.सी, मछुआ दुर्घटना बीमा, निषादराज बोट सब्सिडी योजना, महिला सशक्तीकरण हेतु एयरेटर योजना एवं मत्स्य विकास के कार्यक्रमों की जानकारी प्रदान की गयी।
रजनीश कुमार (एक्वाएक्स) द्वारा मत्स्य विकास की सम्भावनाओं पर प्रस्तुतिकरण किया गया तथा प्रोटीन की उपलब्धता एवं रोजगार सृजन में मत्स्य क्षेत्र के महत्व पर प्रकाश डाला गया। रजनीश द्वारा लाइव फिश, फीड बेस्ड एक्वाकल्चर, जल की गुणवत्ता तथा उत्पादकता पर विस्तार से जानकारी दी गयी। कार्यक्रम में विशेष सचिव मत्स्य सुनील कुमार वर्मा, निदेशक मत्स्य एनएस रहमानी, संयुक्त निदेशक मत्स्य अनिल कुमार, उप निदेशक एक्वाएक्स समीर पात्रा, अध्यक्ष एक्वाएक्स वीनू दन्तूलूरी तथा अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। तकनीकी सत्र के प्रथम दिन डा. संजय श्रीवास्तव (मेधा हैचरी महराजगंज) द्वारा मत्स्य बीज उत्पादन, राजीव रंजन सिंह (आर.एन.आर. एक्वा लखनऊ) द्वारा कैट फिश फार्मिंग, मनोज शर्मा द्वारा झींगा पालन, मनीष वर्मा द्वारा केज कल्चर एवं शुभम सिंघ द्वारा आर्नामेन्टल फिश फार्मिंग पर प्रजेन्टेशन दिया गया।

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