उल्लास मेले में दिखी भारत के साक्षरता अभियान की उपलब्धियां
नई दिल्ली। स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (डीबोएसईएल) के सचिव, टी. के. अनिल कुमार ने आज नई दिल्ली में उल्लास मेला का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि उल्लास मेला एक ऐसा अवसर प्रदान करता है जहां हम एक-दूसरे के सफर को देख सकते हैं, साझा कर सकते हैं और उनसे सीख सकते हैं। उन्होंने उल्लास मेले को सभी प्रतिभागी शिक्षार्थियों, स्वयंसेवक शिक्षकों एवं राज्यों/केंद्र-शासित प्रदेशों को समर्पित किया और देश में साक्षरता अभियान को मजबूत करने में उनके सामूहिक योगदान की सराहना की।

सचिव ने सांस्कृतिक समृद्धि एवं विविधता को दर्शाने वाले रंग-बिरंगे और जीवंत प्रदर्शनी स्टॉलों की सराहना की और पूरी तरह से कार्यशील साक्षरता वाले राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से आग्रह किया कि वे उल्लास मेले के अगले चरण में नेतृत्व करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह सफ़र लगातार सीखते रहने, साक्षरता को मज़बूत करने और यह सुनिश्चित करने के लिए जारी रहना चाहिए कि शिक्षा का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। युवा पीढ़ी से साक्षरता आंदोलन में सक्रिय साझेदार बनने का आग्रह करते हुए उन्होंने युवाओं से साक्षरता अभियान में हिस्सा लेने और इसे सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफार्मों के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने का नागरिक कर्तव्य निभाने का आग्रह किया।
वित्तीय, कानूनी और डिजिटल साक्षरता के महत्व पर जोर, 28 राज्यों की उपलब्धियां प्रदर्शित
सभा को संबोधित करते हुए, एनसीईआरटी के निदेशक प्रो. दिनेश प्रसाद सकलानी ने उल्लास को अवसरों की एक ऐसी खिड़की के रूप में वर्णित किया जिसके माध्यम से निरक्षर लोग सीखने का सफर शुरू कर सकते हैं। उन्होंने नागरिकों को उनके अधिकारों, ज़िम्मेदारियों एवं आधुनिक समय की आवश्यकताओं को समझने में सक्षम बनाने के लिए वित्तीय, कानूनी, डिजिटल एवं चुनावी साक्षरता के बढ़ते महत्व पर बल दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि एक नया क्रेडिट और प्रोत्साहन संरचना तैयार किया जा सकता है, जिससे छात्र दूसरों को साक्षर बनाने में मदद करके क्रेडिट पॉइंट प्राप्त कर सकें।
28 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों, एनसीईआरटी, एनसीटीई और एनआईओएस ने अपनी उपलब्धियों, बेहतरीन प्रथाओं, शिक्षण सामग्री और नए तरीकों को दिखाने के लिए प्रदर्शनी स्टॉल लगाए। इसमें पूर्ण साक्षर राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की उपलब्धियों पर विशेष जोर दिया गया। दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस समारोह का समापन ‘उल्लास मेला’ के साथ हुआ, जिसमें सांस्कृतिक कार्यक्रमों एवं पैनल चर्चाओं सहित विभिन्न गतिविधियां शामिल थीं।
