UP कैडर की अधिकारी ने मीरजापुर और देवरिया में अपने कार्यकाल की यादें साझा कीं, इस्तीफे की वजह नहीं बताई
संजय मिश्र।
देवरिया/लखनऊ। उत्तर प्रदेश कैडर की आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश सरकार के राजस्व विभाग में विशेष सचिव के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रही थीं। इस्तीफे के बाद दिव्या मित्तल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक विस्तृत पोस्ट साझा की। हालांकि, उन्होंने अपने पद से हटने के पीछे की वजह को लेकर पोस्ट में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी है।
उनकी पोस्ट सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे बड़ी संख्या में लोगों ने साझा किया। इसके साथ ही इस्तीफे को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं और प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं।
सोशल मीडिया पर भी सक्रिय रही हैं दिव्या मित्तल
आईएएस अधिकारी के तौर पर जिम्मेदारियां निभाने के साथ दिव्या मित्तल सोशल मीडिया पर भी काफी सक्रिय रही हैं। वह समय-समय पर सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के साथ अपने अनुभव और उपयोगी सुझाव साझा करती रही हैं। दिव्या मित्तल की सोशल मीडिया गतिविधियों में किताबों और पढ़ने से जुड़े विषयों पर पोस्ट भी शामिल रहे हैं। इसके अलावा वह विभिन्न मुद्दों पर लोगों का उत्साह बढ़ाने और उन्हें सकारात्मक सलाह देने वाली पोस्ट साझा करती रही हैं।
अलग-अलग जिलों में जिलाधिकारी के रूप में तैनाती के दौरान भी उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर कई पोस्ट देखने को मिले। वह वीडियो संदेशों के जरिए स्थानीय लोगों से संवाद करतीं और विभिन्न विषयों पर अपनी बात रखती रही हैं। उनके कई वीडियो से यह भी झलकता रहा है कि वह अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारियों और काम से काफी जुड़ी हुई थीं। सार्वजनिक मंचों पर उनकी सक्रियता के कारण भी वह सोशल मीडिया यूजर्स के बीच चर्चा में रही हैं।
लंदन से लौटकर चुना देश सेवा का रास्ता
दिव्या मित्तल ने अपने संदेश में लिखा, “साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद लंदन में नौकरी लग गयी। पर सब कुछ पा लेने पर भी कुछ अधूरा लगता था। अपने देश से दूर होना खलता था।” उन्होंने IIT दिल्ली से बी.टेक और IIM बैंगलोर से MBA किया। इसके बाद लंदन में जेपी मॉर्गन में ट्रेडर के तौर पर करोड़ों के पैकेज पर काम किया। 2012 की UPSC परीक्षा में 68वीं रैंक हासिल कर वह IAS बनीं।
देवरिया और मीरजापुर को बताया सीख का दौर
अपने संदेश में उन्होंने देवरिया और मीरजापुर का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने लिखा कि मीरजापुर ने सिखाया कि “असंभव कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है” और देवरिया ने सिखाया कि “सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है।” DM के तौर पर मीरजापुर में उनके कार्यकाल के दौरान हलिया ब्लॉक के सुदूर पहाड़ी गांव लहुरियादह में आजादी के 75 साल बाद पहली बार नल से जल पहुंचा था, जिसके लिए उनकी खूब सराहना हुई थी। उन्होंने अपने कार्यकाल के सबसे भावुक पल को याद करते हुए लिखा कि लहुरियादह की एक वृद्ध महिला ने पानी आने पर कुछ नहीं कहा, बस कांपते हाथों से उनका सिर छूकर आशीर्वाद दिया। “पद आज छूट गया है, लेकिन वह स्पर्श और देश की मिट्टी से मिला सपना जीवन भर साथ रहेगा,” उन्होंने लिखा। अपने संदेश के अंत में उन्होंने सभी अधिकारियों, कर्मचारियों और साथियों का आभार जताया और कहा कि उन्होंने सीखा कि हर सरकारी फाइल के पीछे एक व्यक्ति होता है और उसकी गरिमा बनाए रखना ही न्याय है।
