विरासत से पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा देगा यूपी- अमृत अभिजात
लखनऊ। उत्तर प्रदेश अब अपनी ऐतिहासिक इमारतों, किलों, महलों और हवेलियों को पर्यटन और रोजगार से जोड़ने की तैयारी में है। मंगलवार को लखनऊ के ताज होटल में भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के कार्यक्रम में पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने प्रदेश में विरासत पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरें हैं। सरकार का जोर इनके संरक्षण के साथ-साथ पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करने और निजी निवेश को बढ़ावा देने पर है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और कारोबार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
अमृत अभिजात ने बताया कि पर्यटन नीति-2022 में हेरिटेज टूरिज्म के लिए कई रियायतें दी गई हैं। हेरिटेज सर्किट की पर्यटन इकाइयों को पूंजी निवेश पर 30 प्रतिशत तक सब्सिडी, स्टांप शुल्क में 100 प्रतिशत छूट और पांच प्रतिशत ब्याज सब्सिडी दी जा रही है। रोजगार बढ़ाने के लिए भी प्रोत्साहन का प्रावधान है।
उन्होंने बताया कि 1950 से पहले बने पुराने किले, हवेलियां, कोठियां और महल बिना उनकी वास्तुकला बदले हेरिटेज होटल के रूप में चलाए जा सकते हैं। प्रदेश में अब तक पांच हेरिटेज होमस्टे के आवेदन और एक प्रमाणित इकाई है। वहीं 37 हेरिटेज होटल के आवेदन आए हैं और 14 इकाइयां प्रमाणित हो चुकी हैं। कुल 15 हेरिटेज पर्यटन इकाइयों को प्रमाणपत्र मिल चुका है, जिनमें 588.21 करोड़ रुपये का निवेश शामिल है।
चार ऐतिहासिक संपत्तियों को पर्यटन से जोड़ने की तैयारी
पर्यटन विभाग कई ऐतिहासिक संपत्तियों को नए तरीके से इस्तेमाल करने की संभावनाएं तलाश रहा है। इनमें बिठूर की बारादरी, झांसी का रघुनाथ राव पैलेस, ललितपुर का बालबेहट किला और महोबा का मस्तानी महल शामिल हैं। खासतौर पर बुंदेलखंड के किलों और ऐतिहासिक इमारतों को पर्यटन से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
डेस्टिनेशन वेडिंग पर भी जोर
प्रदेश में आगरा, लखनऊ, वाराणसी, मथुरा-वृंदावन और अयोध्या को डेस्टिनेशन वेडिंग के प्रमुख केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है। ताजमहल और अन्य ऐतिहासिक स्थल बड़े आयोजनों और देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
अमृत अभिजात ने कहा कि सरकार विरासत पर्यटन के साथ ईको टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म, ग्रामीण पर्यटन और युवा पर्यटन को भी बढ़ावा दे रही है। एआई आधारित बहुभाषी गाइड, एआर-वीआर और स्मार्ट सुविधाओं के जरिए ऐतिहासिक स्थलों पर पर्यटकों का अनुभव बेहतर करने की तैयारी है।
उन्होंने कहा कि ‘यूपी नहीं देखा तो इंडिया नहीं देखा’ ब्रांड के जरिए प्रदेश की पर्यटन पहचान को मजबूत किया जा रहा है। रामायण, बौद्ध, कृष्ण-ब्रज, सूफी और हेरिटेज सर्किट के साथ अयोध्या, वाराणसी, प्रयागराज और कुशीनगर में पर्यटन निवेश को बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य विरासत को संरक्षित रखते हुए उसे रोजगार, कारोबार और आर्थिक विकास का माध्यम बनाना है।
