जटिल सर्जरी और पुनर्निर्माण उपचार में मिलेगी बड़ी सुविधा
लखनऊ। चिकित्सा विज्ञान एवं पुनर्निर्माण शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू), लखनऊ के अस्थि रोग विभाग में आज उत्तर प्रदेश के प्रथम समग्र बोन एवं टिश्यू बैंक का शुभारंभ कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद द्वारा किया गया। इस अवसर पर अस्थि रोग विभागाध्यक्ष प्रो. आशीष कुमार, बोन एवं टिश्यू बैंक के इंचार्ज प्रो. कुमार शान्तनु, बोन एवं टिश्यू बैंक के सह-इंचार्ज डॉ. मधुसूदन, वरिष्ठ चिकित्सक, संकाय सदस्य, रेजिडेंट डॉक्टर एवं विभिन्न विभागों के चिकित्सक उपस्थित रहे।
यह अत्याधुनिक बोन एवं टिश्यू बैंक बोन, लिगामेंट, टेंडन एवं अन्य मस्कुलोस्केलेटल टिश्यू के वैज्ञानिक रिट्रीवल (Retrieval), प्रोसेसिंग (Processing), संरक्षण (Preservation), सुरक्षित भंडारण (Storage) एवं आवश्यकता अनुसार वितरण (Distribution) के उद्देश्य से विकसित किया गया है। यह सुविधा जटिल बोन डिफेक्ट, बोन ट्यूमर, रिवीजन जॉइंट रिप्लेसमेंट, स्पाइन सर्जरी, स्पोर्ट्स इंजरी, लिगामेंट रिकंस्ट्रक्शन, लिंब साल्वेज तथा विभिन्न प्रकार की पुनर्निर्माण शल्यक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
यह बोन एवं टिश्यू बैंक केवल अस्थि रोग विभाग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्लास्टिक सर्जरी, न्यूरोसर्जरी, ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जरी, डेंटल विभाग, ऑन्कोलॉजी, बर्न एवं रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी सहित अनेक विभागों के रोगियों के उपचार में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा। इससे उत्तर प्रदेश के साथ-साथ आसपास के राज्यों के मरीजों को भी लाभ मिलेगा।
बोन एवं टिश्यू बैंक के प्रमुख लाभ
इस बोन एवं टिश्यू बैंक की स्थापना से जटिल फ्रैक्चर, बड़े बोन डिफेक्ट, बोन ट्यूमर के बाद पुनर्निर्माण, रिवीजन जॉइंट रिप्लेसमेंट, स्पाइन सर्जरी, स्पोर्ट्स इंजरी, लिगामेंट रिकंस्ट्रक्शन तथा लिंब साल्वेज जैसी जटिल शल्यक्रियाओं के लिए सुरक्षित एवं उच्च गुणवत्ता वाले बोन एवं टिश्यू ग्राफ्ट प्रदेश में ही उपलब्ध हो सकेंगे। इससे मरीजों को अन्य राज्यों या दूरस्थ संस्थानों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा तथा उपचार में होने वाली देरी कम होगी।
वैज्ञानिक रूप से संरक्षित एलोग्राफ्ट उपलब्ध होने से कई परिस्थितियों में मरीज के शरीर से अतिरिक्त हड्डी (ऑटोग्राफ्ट) निकालने की आवश्यकता भी कम होगी, जिससे अतिरिक्त चीरा, दर्द, रक्तस्राव तथा डोनर साइट से संबंधित जटिलताओं में कमी आएगी। यह सुविधा जटिल शल्यक्रियाओं की सफलता बढ़ाने, शीघ्र पुनर्वास सुनिश्चित करने तथा मरीजों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने में सहायक होगी।
इसके अतिरिक्त यह बोन एवं टिश्यू बैंक चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान, सर्जिकल प्रशिक्षण तथा टिश्यू डोनेशन के प्रति जन-जागरूकता को भी नई दिशा प्रदान करेगा और भविष्य में उत्तर भारत के एक प्रमुख रीजनल रेफरल सेंटर के रूप में विकसित होगा।
सेवाएं शीघ्र होंगी प्रारंभ
बोन एवं टिश्यू बैंक की संपूर्ण अधोसंरचना, क्लीन रूम, स्टरल प्रोसेसिंग क्षेत्र, अत्याधुनिक उपकरण, उच्च क्षमता का लाइओफिलाइज़र (Lyophilizer), -40°C डीप फ्रीजर, -80°C अल्ट्रा-लो टेम्परेचर डीप फ्रीजर, गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली तथा कोल्ड-चेन व्यवस्था पूरी तरह तैयार है। वर्तमान में आवश्यक औपचारिक एवं नियामकीय स्वीकृतियों की अंतिम प्रक्रिया चल रही है। इनके पूर्ण होते ही आगामी कुछ दिनों में बोन एवं टिश्यू बैंक की नियमित सेवाएं प्रारंभ कर दी जाएंगी।
भारत में संगठित बोन बैंकिंग की शुरुआत वर्ष 1988 में टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल, मुंबई में देश के प्रथम बोन बैंक की स्थापना से हुई थी। उसी गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाते हुए केजीएमयू ने उत्तर प्रदेश का प्रथम समग्र बोन एवं टिश्यू बैंक विकसित कर राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं में एक नया अध्याय जोड़ा है।
KGMU में बोन एवं टिश्यू बैंक से चिकित्सा सेवाओं को नई दिशा
कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने कहा कि “बोन एवं टिश्यू बैंक की स्थापना केजीएमयू एवं उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। इससे मरीजों को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण बोन एवं टिश्यू ग्राफ्ट उपलब्ध होंगे तथा चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और नैतिक टिश्यू डोनेशन को नई दिशा मिलेगी। यह सुविधा प्रदेश में उन्नत पुनर्निर्माण शल्य चिकित्सा को और सुदृढ़ करेगी।”
अस्थि रोग विभागाध्यक्ष प्रो. आशीष कुमार ने कहा—“ कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद के दूरदर्शी नेतृत्व, सतत मार्गदर्शन एवं पूर्ण सहयोग के बिना इस महत्वाकांक्षी परियोजना को साकार करना संभव नहीं था। उनके प्रोत्साहन से आज केजीएमयू उत्तर प्रदेश का प्रथम समग्र बोन एवं टिश्यू बैंक विकसित करने में सफल हुआ है। यह सुविधा जटिल फ्रैक्चर, बोन ट्यूमर, रिवीजन जॉइंट रिप्लेसमेंट, स्पाइन सर्जरी, स्पोर्ट्स इंजरी, लिगामेंट रिकंस्ट्रक्शन तथा लिंब साल्वेज जैसी उन्नत शल्यक्रियाओं के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी और केजीएमयू को टिश्यू ट्रांसप्लांटेशन एवं पुनर्निर्माण शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में एक अग्रणी केंद्र के रूप में स्थापित करेगी।”
बोन एवं टिश्यू बैंक के इंचार्ज प्रो. कुमार शान्तनु ने कहा—“यह बोन एवं टिश्यू बैंक राष्ट्रीय मानकों एवं गुणवत्ता दिशा-निर्देशों के अनुरूप विकसित किया गया है। इसमें डोनर स्क्रीनिंग, संक्रमण की जांच, स्टरल रिट्रीवल, वैज्ञानिक प्रोसेसिंग, ट्रिपल स्टरल पैकेजिंग, पूर्ण ट्रेसेबिलिटी, गुणवत्ता नियंत्रण तथा अल्ट्रा-लो टेम्परेचर संरक्षण की अत्याधुनिक व्यवस्था उपलब्ध है। प्रत्येक बोन एवं टिश्यू ग्राफ्ट को एक विशिष्ट बोन बैंक आईडी प्रदान की जाएगी, जिससे उसकी पूर्ण ट्रेसेबिलिटी एवं रोगी सुरक्षा सुनिश्चित होगी। यह सुविधा अनेक विभागों को बोन, लिगामेंट एवं अन्य मस्कुलोस्केलेटल टिश्यू ग्राफ्ट उपलब्ध कराएगी।”
मीडिया सेल प्रभारी प्रो. के.के. सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश के प्रथम समग्र बोन एवं टिश्यू बैंक की स्थापना केजीएमयू की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जिससे प्रदेश एवं आसपास के राज्यों के हजारों मरीजों को भविष्य में लाभ मिलेगा।
इस बोन एवं टिश्यू बैंक के शुभारंभ के साथ केजीएमयू ने उत्तर प्रदेश में उन्नत टिश्यू प्रत्यारोपण सेवाओं की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। यह सुविधा भविष्य में उच्च गुणवत्ता वाले बोन एवं टिश्यू ग्राफ्ट की उपलब्धता सुनिश्चित करने, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान को बढ़ावा देने तथा पुनर्निर्माण शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में केजीएमयू को राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्टता के केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
