गोवा में पांच दिवसीय आध्यात्मिक Shiv Yog शिविर का शुभारंभ
पणजी। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर गोवा आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति का प्रमुख केंद्र बन गया। शिवयोग आचार्य डॉ. ईशान शिवानंद जी के सान्निध्य में पांच दिवसीय ‘त्रिपुरा रहस्य महासाधना’ का शुभारंभ बुधवार, 29 जुलाई से हुआ। यह विशेष साधना शिविर 2 अगस्त 2026 तक आयोजित किया जाएगा, जिसमें देश-विदेश से हजारों शिवयोग साधक भाग ले रहे हैं।
दीप प्रज्वलन और गुरु वंदना से हुआ शुभारंभ
गोवा विश्वविद्यालय परिसर स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी इंडोर स्टेडियम में आयोजित इस आध्यात्मिक शिविर की शुरुआत दीप प्रज्वलन और गुरु वंदना के साथ हुई। साधकों ने अपने सद्गुरु अवधूत बाबा शिवानंद के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करते हुए गुरु-शिष्य परंपरा का सम्मान किया। पूरे परिसर में भक्ति, श्रद्धा और सकारात्मक ऊर्जा का विशेष वातावरण देखने को मिला।
गुरु पूर्णिमा पर उमड़ी श्रद्धालुओं की आस्था
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर हजारों साधक प्रेम, श्रद्धा और समर्पण के भाव के साथ शिवयोग आचार्य डॉ. ईशान शिवानंद जी के दिव्य दर्शन के लिए एकत्र हुए। आयोजकों के अनुसार यह आयोजन केवल एक साधना शिविर नहीं, बल्कि भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा के प्रति सम्मान व्यक्त करने और आध्यात्मिक मूल्यों को आत्मसात करने का अवसर है। इसी अवसर पर साधकों ने आचार्य ईशान शिवानंद जी का जन्मोत्सव भी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया।
त्रिपुरा रहस्य के माध्यम से आत्मबोध का संदेश
शिविर में रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, भक्ति संगीत और भावपूर्ण भजनों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इसके बाद आचार्य डॉ. ईशान शिवानंद जी ने त्रिपुरा रहस्य के आध्यात्मिक सिद्धांतों पर आधारित प्रवचन दिए। उन्होंने बताया कि यह ज्ञान व्यक्ति को आत्मबोध, आंतरिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य अपने भीतर की चेतना को पहचानता है, तभी जीवन का वास्तविक उद्देश्य स्पष्ट होता है।
‘साधना से जीवन होता है सरल और सफल’
अपने संबोधन में आचार्य ईशान शिवानंद जी ने नियमित साधना के महत्व पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि साधना केवल आध्यात्मिक अभ्यास नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित, सकारात्मक और उद्देश्यपूर्ण बनाने का माध्यम है। उनके अनुसार साधना से संचित कर्मों का प्रभाव कम होता है और व्यक्ति का जीवन अधिक सरल, शांत तथा सफल बनता है।

उन्होंने उपस्थित साधकों से कहा कि वे स्वयं को सौभाग्यशाली समझें कि उन्हें गुरु का सान्निध्य प्राप्त हुआ है। गुरु के मार्गदर्शन में किया गया आध्यात्मिक अभ्यास जीवन में नई दिशा और आत्मविश्वास प्रदान करता है। शिव योग की साधना से संचित कर्म कटते हैं और साधकों की चेतना ऊपर उठती है।
मंत्रोच्चार से गूंजा साधना स्थल
सत्र के दौरान आचार्य ईशान शिवानंद जी ने उपस्थित साधकों से निम्न संस्कृत श्लोक का सामूहिक उच्चारण भी कराया—
“अवधूतं महासिद्धं
आधि-व्याधि-प्रशमनम्।
भोग-मोक्ष-प्रदं देवं
महासिद्धं नमाम्यहम्॥”
मंत्रोच्चार के दौरान पूरा सभागार आध्यात्मिक ऊर्जा, श्रद्धा और भक्ति से सराबोर हो उठा। सामूहिक मंत्रजाप की दिव्य ध्वनि से वातावरण अत्यंत शांत, सकारात्मक और चेतनापूर्ण बन गया, जहाँ उपस्थित साधकों ने ध्यान एवं साधना के माध्यम से गुरु कृपा का गहन अनुभव किया। इसके साथ ही आचार्य डॉ. ईशान शिवानंद जी ने कई भावपूर्ण आध्यात्मिक भजनों का गायन भी किया, जिनमें सभी साधक पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ सहभागी बने। भजनों की मधुर स्वर-लहरियों ने साधना शिविर के आध्यात्मिक वातावरण को और अधिक जागृत एवं ऊर्जावान बना दिया, जिससे उपस्थित श्रद्धालु भक्ति, ध्यान और आत्मचिंतन के भाव में पूरी तरह लीन हो गए।
2 अगस्त तक चलेगा आध्यात्मिक आयोजन
पांच दिवसीय इस महासाधना शिविर में आगामी दिनों में ध्यान, साधना, आध्यात्मिक प्रवचन और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। आयोजन का उद्देश्य साधकों को आत्मिक उन्नति, सकारात्मक जीवन-दृष्टि और गुरु परंपरा के मूल्यों से जोड़ना है। गुरु पूर्णिमा के इस विशेष अवसर पर आयोजित यह महासाधना शिविर देशभर से आए श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक अनुभव और आत्मपरिवर्तन का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है।

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