- मंत्री राकेश सचान के मार्गदर्शन में युवाओं का अनोखा प्रयोग
- एमएसएमई मंत्री के सुझाव से पारंपरिक मॉडल से सोलर-आधारित तकनीक तक पहुंचा अभिनव प्रोजेक्ट
- जीएल बजाज के छात्र देव मंथन का ‘सोलर रिचार्जेबल लाइट-प्रोजेक्शन फ्रेम’ बना आत्मनिर्भर भारत की मिसाल
लखनऊ। एमएसएमई मंत्री राकेश सचान के मार्गदर्शन में एक युवा नवाचार ने नई दिशा प्राप्त की है, जिसने न केवल तकनीक और रचनात्मकता को जोड़ा है, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को भी बढ़ावा दिया है। जीएल बजाज संस्थान के बीटेक मैकेनिकल छात्र देव मंथन द्वारा विकसित भारत का पहला सोलर आधारित और रिचार्जेबल लाइट-प्रोजेक्शन फोटो फ्रेम आज नवाचार और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बनकर उभर रहा है। यह फ्रेम अपनी संरचना और कार्यप्रणाली के कारण बेहद खास है। सामान्य स्थिति में यह बिल्कुल साधारण दिखाई देता है, लेकिन जैसे ही इसके पीछे प्रकाश डाला जाता है, इसमें छिपा हुआ चित्र, डिजाइन या संदेश स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आता है। “Hidden in Plain Sight” की अवधारणा पर आधारित यह प्रयोग तकनीकी दृष्टि से जितना रोचक है, उतना ही व्यावहारिक भी।
इस नवाचार की दिशा उस समय बदली जब देव मंथन की मुलाकात एमएसएमई मंत्री राकेश सचान से हुई। प्रारंभिक रूप से यह फ्रेम पारंपरिक बिजली आधारित बैकलाइट पर निर्भर था, जिससे इसकी उपयोगिता सीमित हो जाती थी। मंत्री सचान ने इस प्रोजेक्ट का अवलोकन करते हुए इसे सोलर ऊर्जा से जोड़ने का सुझाव दिया। यह सुझाव इस प्रोजेक्ट के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। मंत्री का मानना था कि नवाचार केवल तकनीकी नहीं, बल्कि टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल भी होना चाहिए। उनके इसी दृष्टिकोण ने एक साधारण प्रोटोटाइप को उन्नत और व्यवहारिक उत्पाद में बदलने की राह दिखाई।
मंत्री सचान के सुझाव के बाद देव मंथन ने अपने मेंटर विश्वास गुप्ता के साथ मिलकर इस दिशा में काम शुरू किया। करीब 15-20 दिनों तक लगातार प्रयोग, असफलताओं और सुधारों के बाद उन्होंने एक ऐसा फ्रेम विकसित किया, जो सोलर पैनल के माध्यम से चार्ज होता है और पूरी तरह वायरलेस तरीके से काम करता है। अब यह फ्रेम कहीं भी आसानी से लगाया जा सकता है, चाहे घर के अंदर हो या बाहर। यह न केवल बिजली की बचत करता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देता है।
इस पूरे प्रोजेक्ट में एमएसएमई विभाग की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। मंत्री राकेश सचान के नेतृत्व में विभाग लगातार युवाओं को नवाचार, स्टार्टअप और उद्यमिता के लिए प्रेरित कर रहा है। एमएसएमई के माध्यम से युवाओं को न केवल मार्गदर्शन मिलता है, बल्कि उन्हें अपने विचारों को उत्पाद में बदलने के लिए संसाधन और प्लेटफॉर्म भी उपलब्ध कराए जाते हैं। यह पहल “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” जैसे अभियानों को जमीनी स्तर पर मजबूत करने का काम कर रही है। देव मंथन अब इस प्रोजेक्ट को एक स्टार्टअप के रूप में विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। “The Ivory Spark Studio” के माध्यम से वह इस उत्पाद को बाजार तक पहुंचाने की योजना बना रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उन्हें शुरुआती ऑर्डर भी मिलने लगे हैं, जो इस उत्पाद की उपयोगिता और आकर्षण को दर्शाता है। उनका लक्ष्य केवल एक उत्पाद बनाना नहीं, बल्कि एक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित कर रोजगार के नए अवसर सृजित करना है। यह पहल स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा दे सकती है।
