लखनऊ। बस्ती के वशिष्ठ नगर में आयोजित सनातन धर्म संवाद जिसमें ज्योतिष्पीठाश्वर जगत गुरु महाराज अतिमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, पूर्व आई पी एस जुगल किशोर तिवारी, पूर्व आई ए एस अलंकार अग्निहोत्री सवर्ण आर्मी भारत के राष्ट्रीय संरक्षक एडवोकेट अनिल मिश्रा मंचासिन की उपस्थित में सवर्ण समाज की सभा को संबोधित करते हुए सवर्ण आर्मी भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज प्रसाद चौबे ने कहा कि यह सम्मेलन वर्तमान सामाजिक, धार्मिक और वैचारिक परिस्थितियों पर चिंतन मनन का एक गहरा दर्पण है। “सनातन धर्म संवाद” शीर्षक अपने आप में ही एक संकेत देता है कि आज का समय केवल आस्था का नहीं, बल्कि संवाद, चिंतन और पुनर्स्थापन का है।
यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक वैचारिक जागरण का प्रयास है। इसमें संतों, शंकराचार्यों और विद्वानों की परंपरा, ज्ञान और आध्यात्मिक नेतृत्व को एक मंच पर लाने का प्रयास किया जा रहा है। गौमाता भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों की प्रतीक है। वर्तमान परिस्थिति में गोरक्षा कैसे हो इस विषय पर भी गंभीर चिंतन करके समाधान निकालने की आवश्यकता है l आज का समाज कई स्तरों पर संघर्ष कर रहा है—सांस्कृतिक पहचान, धार्मिक अस्मिता, सामाजिक विभाजन और राजनीतिक ध्रुवीकरण। ऐसे समय में “संवाद” अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है।
आज बहुत से लोग धर्म के नाम पर केवल परंपराओं का पालन कर रहे हैं, परंतु उनके पीछे के ज्ञान और उद्देश्य से अनभिज्ञ हैं। इस प्रकार के आयोजन यदि सही दिशा में हों, तो वे धर्म को केवल कर्मकांड से निकालकर ज्ञान और विवेक की ओर ले जा सकते हैं। वर्तमान में समाज जाति, वर्ग और विचारधारा के आधार पर बंटा हुआ है। ऐसे में यह प्रयास एक सकारात्मक पहल है l आज की युवा पीढ़ी को इस अभियान से जोड़ने के लिए यह आवश्यक है कि इन विषयों को आधुनिक संदर्भ में समझाया जाए, अन्यथा यह केवल एक सीमित वर्ग तक ही सिमट सकता है।
आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है—धर्म का आचरण, ज्ञान का विस्तार और समाज में संतुलन की स्थापना। यदि “सनातन धर्म संवाद” इस दिशा में एक सशक्त कदम बनता है, तो यह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक परिवर्तन की शुरुआत सिद्ध होगा। सवर्ण आर्मी भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज प्रसाद चौबे ने कहा कि सवर्ण युवा भी बराबर के हकदार है,कानून में भेद भाव नहीं चलेगा कुर्सी पर बैठे नेता किसी भ्रम में न रहे सत्ता किसी के बाप की जागीर नहीं है.
