डेस्क। आज पूरे देश में महावीर जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जा रही है। यह पावन पर्व भगवान महावीर के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है, जिन्होंने मानवता को अहिंसा, सत्य और करुणा का मार्ग दिखाया। इस अवसर पर श्रद्धालु उनके बताए सिद्धांतों को जीवन में अपनाने का संकल्प लेते हैं। भगवान महावीर ने अपने जीवन के माध्यम से पांच प्रमुख सिद्धांत—अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह—का उपदेश दिया, जिन्हें पंच महाव्रत कहा जाता है। ये सिद्धांत जैन धर्म की नींव माने जाते हैं और आज भी लोगों को नैतिक, संयमित और शांतिपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं।
इतिहास के अनुसार, भगवान महावीर का जन्म लगभग 599 ईसा पूर्व बिहार के कुंडग्राम में एक राजपरिवार में हुआ था। उनके पिता राजा सिद्धार्थ और माता त्रिशला थीं। जन्म के समय राज्य में समृद्धि बढ़ने के कारण उनका नाम वर्द्धमान रखा गया। बचपन से ही वे निडर, शांत और करुणामय स्वभाव के थे। 30 वर्ष की आयु में वर्द्धमान ने सांसारिक सुखों का त्याग कर सत्य की खोज में घर छोड़ दिया। उन्होंने 12 वर्षों तक कठोर तपस्या और ध्यान किया और अंततः कैवल्य ज्ञान प्राप्त कर भगवान महावीर के रूप में विख्यात हुए।
महावीर जयंती के अवसर पर श्रद्धालु उपवास रखते हैं, जैन ग्रंथों का पाठ करते हैं और दान-पुण्य के कार्यों में भाग लेते हैं। इस दिन अहिंसा और शाकाहार के प्रचार के लिए भी विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। यह पर्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि मानवता, शांति और आत्मशुद्धि का संदेश देता है। महावीर जयंती हमें सादगी, करुणा और अनुशासन के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देती है।
