पंडित सुनील पांडेय।
डेस्क। ज्योतिष शास्त्र में पंचक को एक विशेष और संवेदनशील अवधि माना जाता है। यह हर महीने आने वाले पांच दिनों का समय होता है, जिसमें कुछ कार्यों को करने से बचने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि इस दौरान किए गए कार्यों का अपेक्षित शुभ फल नहीं मिलता, हालांकि हर पंचक अशुभ नहीं होता।
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, जब चंद्रमा धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्रों में गोचर करता है, तब पंचक लगता है। पंचक पांच प्रकार के होते हैं—रोग पंचक, अग्नि पंचक, मृत्यु पंचक, चोर पंचक और राज पंचक। इनमें राज पंचक को शुभ और फलदायी माना जाता है।
अप्रैल 2026 में पंचक कब से शुरू होगा
अप्रैल 2026 में पंचक 13 अप्रैल, सोमवार को सुबह 03:44 बजे से शुरू होकर 17 अप्रैल को दोपहर 12:02 बजे तक रहेगा। सोमवार से आरंभ होने के कारण यह राज पंचक होगा, जिसे समृद्धि और सफलता देने वाला माना जाता है।
राज पंचक का महत्व
राज पंचक को पंचकों में सबसे शुभ माना गया है। इस दौरान धार्मिक कार्य, दान-पुण्य और नए कार्यों की शुरुआत करना लाभकारी माना जाता है। यह समय प्रगति और सकारात्मक परिणाम देने वाला समझा जाता है।
पंचक में किन कार्यों से बचें
- लकड़ी या ईंधन जमा करना:
पंचक के दौरान लकड़ी या ईंधन इकट्ठा करना अशुभ माना जाता है। - दक्षिण दिशा में यात्रा:
इस समय दक्षिण दिशा की यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है। - निर्माण कार्य:
घर की छत डालना या नया निर्माण कार्य शुरू करना टालना चाहिए। - पलंग या चारपाई बनवाना:
इस अवधि में शय्या बनवाना उचित नहीं माना जाता। - अंतिम संस्कार से जुड़ी सावधानी:
यदि इस दौरान अंतिम संस्कार करना पड़े, तो विशेष धार्मिक उपाय करने की परंपरा बताई गई है।
पंचक को लेकर मान्यताएं परंपरागत विश्वासों पर आधारित हैं। इसलिए किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले अपने विवेक और परिस्थिति के अनुसार कदम उठाना उचित रहता है।
