अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्राकृतिक खेती जरूरी:- डिप्टी सीएम
लखनऊ। सुशासन को समर्पित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सेवा, संस्कार, सुशासन एवं सम्मान के मूल भाव के साथ 140 करोड़ भारतीयों की निरंतर सेवा के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आज पंडित दीनदयाल उपाध्याय सभागार झांसी में जनपद स्तरीय विकसित भारत संकल्प सम्मेलन, विकास प्रदर्शनी एवं प्राकृतिक खेती कार्यशाला का भव्य आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य सांसद झांसी ललितपुर अनुराग शर्मा, अध्यक्ष जिला पंचायत पवन गौतम, विधायक गरौठा जवाहर लाल राजपूत, विधायक मऊरानीपुर डा0 रश्मि आर्या, विधायक बबीना राजीव सिंह परीछा, सदस्य विधान परिषद श्रीराम तीर्थ सिंघल, सदस्य विधान परिषद रमा निरंजन, सदस्य विधान परिषद शिक्षक डॉ0 बाबूलाल तिवारी,भाजपा जिलाध्यक्ष प्रदीप पटेल, महानगर अध्यक्ष सुधीर सिंह अन्य जनप्रतिनिधिगण , मुख्य विकास अधिकारी रामेश्वर सुधाकर सब्बनवाड सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, कर्मचारी, किसान एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।
झांसी में विकास प्रदर्शनी: सरकार की योजनाओं से लाभान्वित हो रहा हर वर्ग
कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्ज्वलन एवं विकास प्रदर्शनी के अवलोकन के साथ हुआ। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ने सांसद सहित समस्त विधायक एवं सदस्य, विधान परिषद एवं अन्य अतिथियों द्वारा जिला प्रशासन तथा कृषि विभाग सहित विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण किया गया तथा विभागीय योजनाओं एवं उपलब्धियों की जानकारी प्राप्त की गई।
गोष्ठी के मुख्य सत्र को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीते 12 वर्षों में भारत ने विकास, सुशासन, आत्मनिर्भरता एवं जनकल्याण के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियां प्राप्त की हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने समाज के अंतिम व्यक्ति के द्वार तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने का कार्य किया है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री की सर्वोच्च प्राथमिकता है, बुंदेलखंड का विकास। उन्होंने कहा कि विगत 12 वर्षों में जो विकास हुआ है “वह झांकी है पूरी पिक्चर अभी बाकी है”। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड हर घर नल जल की तरह हर खेत में पहुंचेगा पानी यह प्रधानमंत्री जी की प्राथमिकता है, उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाकर कृषि लागत कम करने तथा भूमि की उर्वरा शक्ति को सुरक्षित रखने का आह्वान किया।
उपमुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि केंद्र एवं प्रदेश सरकार की योजनाओं से समाज के प्रत्येक वर्ग का जीवन स्तर बेहतर हुआ है। उन्होंने कहा कि किसान, महिला, युवा एवं गरीब वर्ग विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित होकर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती को अपनाने तथा कृषि विभाग द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहयोग का लाभ लेने का आग्रह किया। उन्होंने बुंदेलखंड में दलहन और तिलहन को बढ़ावा देने के लिए भी किसानों को आगे आने का सुझाव दिया।
सांसद अनुराग शर्मा बोले: प्राकृतिक खेती से बढ़ेगी आय और मिट्टी की उर्वरा शक्ति
अनुराग शर्मा सांसद झांसी झांसी’ललितपुर ने उपस्थित अन्यदाताओं से कहा कि सभी प्राकृतिक खेती की ओर चले तो निश्चय ही हम स्वस्थ होंगे और धन धान्य से परिपूर्ण भी होंगे, उन्होंने बताया कि हमारा परिवार लगभग 100 वर्षों से प्रकृति खेती से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि जनपद में सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती कृषि क्षेत्र में एक सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बन रही है, जिससे उत्पादन लागत कम होने के साथ-साथ मिट्टी की गुणवत्ता, जैव विविधता एवं पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है।
सांसद अनुराग शर्मा ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना की जानकारी देते हुए कहा कि सबसे ज्यादा बुंदेलखंड को योजना का लाभ मिल रहा है। उन्होंने उपस्थित बलिनी दीदियों को संबोधित करते हुए कहा की गोमाता की सुरक्षा करें,दूध का उत्पादन बढ़ रहा है, किसानों को लाभ होगा। इसके अतिरिक्त, उन्होंने गोबर का खेती किसानी में प्रयोग करने का सुझाव दिया ताकि जैविक खेती के माध्यम से अपने उत्पाद को अच्छी दामों में बेचा जा सके। कार्यक्रम के दौरान आयोजित प्राकृतिक खेती कार्यशाला में किसान भाइयों को प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों, तकनीकों एवं लाभों के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। कृषि विशेषज्ञों द्वारा रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने, गौ-आधारित एवं जैविक संसाधनों के उपयोग, जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत, मल्चिंग, फसल विविधीकरण तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण आधारित खेती की विधियों के बारे में जानकारी दी गई। किसानों को बताया गया कि प्राकृतिक खेती से उत्पादन लागत में कमी आती है, मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ती है, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है तथा गुणवत्तापूर्ण कृषि उत्पाद प्राप्त होते हैं। साथ ही किसानों को आय बढ़ाने एवं टिकाऊ कृषि व्यवस्था विकसित करने के लिए प्रेरित किया गया।
झांसी में कृषि कार्यशाला: वैज्ञानिक खेती और जैविक कीट प्रबंधन पर जोर
गोष्ठी के विशेष तकनीकी सत्र में कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डाक्टर अतीक अहमद द्वारा कृषकों को सब्जियों की उन्नत एवं वैज्ञानिक खेती के संबंध में विस्तृत तकनीकी जानकारी दी गई। उन्होंने खरीफ सीजन में आधुनिक नर्सरी प्रबंधन, जलभराव क्षेत्रों के लिए उपयुक्त प्रजातियों का चयन, वैज्ञानिक बुवाई विधि तथा जैविक कीट एवं रोग प्रबंधन के उपायों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में ब्लॉक चिरगांव के ग्राम रमपुरा चिरगांव के प्रगतिशील किसान अवधेश प्रताप सिंह लल्ला द्वारा अपनी सफलता की कहानी साझा की गई। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती एवं गौ-आधारित कृषि पद्धतियों को अपनाकर उन्होंने लागत में कमी तथा आय में वृद्धि प्राप्त की है। उन्होंने जीवामृत एवं बीजामृत के प्रयोग से होने वाले आर्थिक एवं पर्यावरणीय लाभों के संबंध में किसानों को विस्तार से जानकारी दी। उन्हें एवं गुंचीलाल ग्राम रमपुरा चिरगांव को प्राकृतिक खेती करने पर उपमुख्यमंत्री द्वारा प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का समापन विकसित भारत के संकल्प के साथ हुआ। उपस्थित जनसमुदाय ने सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं एवं प्राकृतिक खेती के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी रामेश्वर सुधाकर सब्बनवाड, उप कृषि निदेशक बुद्धि देव द्विवेदी, जिला कृषि अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी, जिला उद्यान अधिकारी सहित समस्त विभागीय अधिकारियों ने सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की।
