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मोदी नेतृत्व में नया भारत: विकास, विरासत और विश्वास की कहानी

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12 वर्षों की उपलब्धियों का सफर

हृदयनारायण दीक्षित।


लखनऊ। राष्ट्रजीवन के विविध क्षेत्रों में राजनीति सबसे सक्रिय क्षेत्र है। राजनीति से ही विधायिका जनहितकारी अधिनियमन करती है। राजनीति के विचार प्रभाव में राष्ट्र शक्तिशाली होते हैं। राजनीति में सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता देर सवेर सरकार बनाते हैं। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। स्वाधीनता आंदोलन के समय समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले सक्रिय रहे हैं। स्वाधीनता आंदोलन के जीवन मूल्य त्याग आधारित थे। स्वतंत्र भारत में राजनीति के उच्चतर मूल्य घटने लगे। दलतंत्र में विश्वास का संकट बढ़ता गया। अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेताओं ने राजनीति पर आए विश्वास के संकट पर कई बार संसद में भी बेचैनी व्यक्त की। लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने सम्पूर्ण क्रांति का आंदोलन चलाया। अन्ना हजारे का आंदोलन भी चला था, लेकिन देश के प्रबुद्ध क्षेत्रों में राजनीति के प्रति निराशा पैदा होती चली गई। लेकिन राजनीति में परिवारवाद, जातिवाद और अल्पसंख्यक तुष्टिकरण बढ़ते गए। राजनीति विचार आधारित नहीं रही। ऐसे में विचार आधारित राजनीति के योद्धा नरेन्द्र मोदी का राष्ट्रीय राजनीति में पदार्पण हुआ। वे गुजरात के मुख्यमंत्री हो चुके थे। उन्होंने विश्वास के संकट को दूर करने का और समूची राजनीति को राष्ट्र की मुख्य धारा में लाने का सफल प्रयास किया। चुनाव में मोदी की गारंटी जैसे आकर्षक जुमलों ने अपना स्थान बनाया। मोदी ने जो कहा वो पूरा कर के दिखाया।


मोदी की गारंटी वाकई अपना रंग ला रही है। जनता उनके नेतृत्व की दीवानी हो गई है। देश के मतदाता किसी बहकावे में नहीं आए। आम जन का विश्वास बढ़ता गया। प्रधानमंत्री ने अपने प्रिय देशवासियों को लगातार संबोधित किया। प्रधानमंत्री ने कोरोना के समय थाली ताली और दीपक जलाओ अभियान का आह्वान किया। उस समय विपक्षी दलों ने इस अभियान का मजाक बनाया। लेकिन पूरा देश मोदी के साथ खड़ा था। मोदी की अपील पर आजादी का अमृत महोत्सव पूरे देश में मनाया गया। हर घर तिरंगा अभियान ने लोगों को राष्ट्रीय ध्वज से जोड़ने का काम किया।


मोदी सरकार के 12 बरस पूरे हुए हैं। मोदी के प्रति आम जनता का विश्वास बढ़ता ही गया। इसके भी ठोस कारण हैं। भाजपा जब नहीं थी, तब वह जनसंघ के रूप में काम करती थी। जनसंघ काल की सदस्यता पर्ची में भारत परमाणु शक्ति संपन्न बने, का संकल्प व्यक्त किया गया था। जम्मू कश्मीर विषयक अनुच्छेद 370 को हटाने का आश्वासन भी दिया गया था। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर बन कर तैयार है। पूजा उपासना जारी है। कॉमन सिविल कोड भी कई राज्यों ने अपना लिया है। जन विश्वास का ही परिणाम है कि अमेरिकी ईरानी युद्ध के प्रभाव में पैदा तेल संकट की चुनौती से भारत सफलतापूर्वक निकल आया है। प्रधानमंत्री ने सीधे देश की जनता से ही तेल खपत में कमी लाने की अपील की। ये प्रधानमंत्री के प्रति आम जनता के बढ़े विश्वास का परिणाम है। उन्होंने सोना खरीदने और विदेश यात्रा से बचने का भी आग्रह किया है।


मोदी सरकार के वोकल फॉर लोकल और आत्मनिर्भर भारत अभियान ने देशवासियों में स्वदेशी के प्रति नया विश्वास जगाया। लोगों ने स्थानीय उत्पादों को, अपने छोटे व्यापारियों को समर्थन देने और भारतीय निर्माण क्षमता पर भरोसा करने का संकल्प लिया। मोदी के कामकाज और व्यवहार का आकर्षण सारी दुनिया पर है। दुनिया में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी है। आज दुनिया के मंच पर भारत पूरे आत्मविश्वास के साथ खड़ा है। इसके पीछे भी देशवासियों का भरोसा है। पहले दुनिया भारत को संभावनाओं वाले देश के रूप में देखती थी। आज दुनिया भारत को समाधान देने वाले देश के रूप में देख रही है। यह परिवर्तन केवल सरकार की वजह से नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के सामूहिक विश्वास की वजह से संभव हुआ है। संप्रति भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन देश के 22 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में भारत समृद्धि के लिए काम कर रहा है।


वर्ष 2014 में देश की जनता ने पहली बार नरेन्द्र मोदी को आशीर्वाद देकर देश सेवा के लिए दिल्ली भेजा था। तब देश ने मोदी सरकार पर भरोसा किया और मोदी जी ने उस भरोसे को अपने परिश्रम से मजबूत किया है। भारतीय जनता पार्टी की सबसे बड़ी ताकत करोड़ों कार्यकर्ताओं का समर्पण और जनता का भरोसा है। विश्वास के कारण ही जनता ने अपना भविष्य गढ़ने की जिम्मेदारी मोदी को सौंप दी है। प्रतिपक्षी दल कभी वोट चोरी, कभी बेईमानी जैसे आरोप लगाते हैं। सरकार के विरुद्ध लोकतंत्र खत्म करने आदि के आरोप लगाते हैं। जनता और मोदी के रिश्तों को नहीं पहचानते मोदी के नेतृत्व में भारत बदल रहा है। जब जब चुनाव होते हैं, सरकार के विरुद्ध अनर्गल आरोप प्रारंभ हो जाते हैं। और ईवीएम के खुलते ही विपक्षी सपने चूर चूर हो जाते हैं। लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका होती है। यहाँ सत्ता पक्ष प्रमाणिक है। लेकिन विपक्ष सुझाव देने और आलोचना करने के कर्तव्य का निर्वहन नहीं करता। मोदी सरकार ने इन 12 वर्षों में भारत ने यह सिद्ध किया है कि आधुनिकता और सांस्कृतिक चेतना साथ-साथ चल सकती हैं।


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश ने अपनी सभ्यता, अपने महापुरुषों और अपने राष्ट्रीय प्रतीकों को जन-जन की चेतना का हिस्सा बनाया। बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव आम्बेडकर से जुड़े पांच स्थलों को पंच तीर्थ के रूप में विकसित करना केवल स्मारक निर्माण नहीं था, बल्कि यह सामाजिक न्याय, समावेशिता और संविधान के मूल्यों को राष्ट्रीय चेतना में स्थापित करने का प्रयास था। महू से लेकर लंदन, नागपुर, दिल्ली और मुंबई तक बाबा साहब के जीवन से जुड़े स्थान आज प्रेरणा के तीर्थ बन चुके हैं। इसी प्रकार आदिवासी समाज के महानायक बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस घोषित कर मोदी सरकार ने यह संदेश दिया है कि भारत प्राचीन राष्ट्र है। इसका इतिहास राजमहलों तक सीमित नहीं बल्कि जंगलों, जनजातियों और संघर्षों का भी इतिहास है। जिन वीरों को वर्षों तक उपेक्षित रखा गया, उन्हें राष्ट्रीय सम्मान देने का कार्य मोदी सरकार में हुआ है।
राष्ट्रीय एकता के प्रतीक लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की भव्य स्टैचू ऑफ यूनिटी विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा है। यह नए भारत की ऊंची सोच का प्रतीक है। यह प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों को बताती है कि भारत की एकता कितने संघर्ष और संकल्प से निर्मित हुई है। औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति का संकल्प भी मोदी सरकार के इन 12 वर्षों में स्पष्ट दिखाई दिया। राजपथ को कर्तव्य पथ बनाना शासन की सोच में परिवर्तन का प्रतीक था। इंडिया गेट पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा स्थापित कर देश ने अपने उन महानायकों को सम्मान दिया जिनके योगदान को लंबे समय तक पर्याप्त स्थान नहीं मिला।

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