लखनऊ विश्वविद्यालय में “The Belief System of Astrology” विषय पर Ph.D. वाइवा सफल
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के समाज कार्य विभाग में शोधार्थी डॉ. तेजस्कर पाण्डेय का शोध प्रबंध “The Belief System of Astrology: A Global Perspective with Special Reference to Indian Astrology” सफलतापूर्वक वाइवा-वोसे (Ph.D. Viva) में अनुमोदित किया गया। डॉ. पाण्डेय एम.एससी. (गणित), ज्योतिष आचार्य होने के साथ-साथ एक वरिष्ठ सिविल सेवा अधिकारी हैं तथा वर्तमान में उत्तर प्रदेश सूचना आयोग, लखनऊ में उपसचिव के पद पर कार्यरत हैं। उनके प्रशासनिक अनुभव और पारंपरिक ज्ञान का यह अद्वितीय समन्वय इस शोध को विशेष महत्व प्रदान करता है।
इस अवसर पर बाह्य परीक्षक के रूप में प्रख्यात संस्कृत विद्वान एवं ज्योतिष विशेषज्ञ Prof. Murli Manohar Pathak, कुलपति, Shri Lal Bahadur Shastri National Sanskrit University, नई दिल्ली, उपस्थित रहे। उन्होंने शोध की गहनता, विषय की व्यापकता तथा इसके अंतर्विषयक दृष्टिकोण की सराहना करते हुए इसे ज्योतिष और समाज विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान बताया।
प्रस्तुत शोध में ज्योतिष को केवल भविष्यवाणी तक सीमित न मानकर एक वैश्विक सामाजिक एवं सांस्कृतिक विश्वास प्रणाली के रूप में स्थापित किया गया है, जो मानव जीवन में निर्णय, पहचान और मानसिक संतुलन प्रदान करने में सहायक है। अध्ययन में गुणात्मक एवं मात्रात्मक दोनों विधियों का उपयोग करते हुए भारत सहित विभिन्न देशों के प्रतिभागियों पर शोध किया गया, जिससे यह निष्कर्ष प्राप्त हुआ कि आधुनिक वैज्ञानिक युग में भी ज्योतिष के प्रति विश्वास व्यापक रूप से विद्यमान है और निरंतर विकसित हो रहा है।
डॉ. पाण्डेय ने अपने शोध में ज्योतिष को सामाजिक कार्य (Social Work) के साथ जोड़ते हुए इसे परामर्श, मानसिक स्वास्थ्य तथा सामाजिक हस्तक्षेप के एक उपयोगी उपकरण के रूप में भी प्रस्तुत किया है। महाकुंभ जैसे बड़े आयोजनों में क्षेत्रीय अध्ययन, विभिन्न वर्गों—प्रशासनिक अधिकारियों, विद्यार्थियों, गृहिणियों एवं पेशेवरों—से प्राप्त अनुभवजन्य निष्कर्ष इस शोध की विशेषता हैं, जो इसकी सामाजिक प्रासंगिकता को और सुदृढ़ करते हैं।
वाइवा के दौरान विशेषज्ञों ने शोध की मौलिकता, इसके व्यावहारिक उपयोग तथा समाज में इसके सकारात्मक प्रभाव की सराहना की। इस अवसर पर विभागाध्यक्ष, शोध निदेशक प्रो. डी. के. सिंह तथा अन्य संकाय सदस्य भी उपस्थित रहे। यह शोध कार्य ज्योतिष को एक जीवंत, गतिशील एवं वैश्विक विश्वास प्रणाली के रूप में स्थापित करता है, जो परंपरा और आधुनिकता के मध्य सेतु का कार्य करते हुए मानव जीवन को दिशा प्रदान करता है तथा सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में नए विमर्श की संभावनाएँ खोलता है।
