TN

TotaRam News

What's Hot

देश का पहला पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन प्रशिक्षण केंद्र स्थापित होगा केजीएमयू में: डॉ. सूर्यकान्त

Table of Content

  • रेस्पिवॉक कॉन्फ्रेंस में चार कार्यशालाओं का हुआ सफल आयोजन
  • रोगों से निपटने के लिए प्रशिक्षण और नई तकनीकों का उपयोग आवश्यकः डॉ. सोनिया नित्यानन्द, कुलपति, केजीएमयू

लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग द्वारा आयोजित रेस्पिवॉक कॉन्फ्रेंस का आज शानदार शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम के मुख्य सूत्रधार डॉ. सूर्यकान्त ने बताया कि इस शैक्षणिक महाकुंभ में देशभर के विभिन्न एम्स एवं चिकित्सा संस्थानों से लगभग 300 पल्मोनोलॉजिस्ट, जनरल फिजिशियन, क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ, पीजी रेजिडेंट्स एवं फिजियोथेरेपिस्ट ने प्रतिभाग कर कॉन्फ्रेंस को सफल बनाया।

इस संदर्भ में डॉ. सोनिया नित्यानन्द ने कहा कि प्रभावी रोग नियंत्रण के लिए चिकित्सकों को सतत प्रशिक्षण और अद्यतन ज्ञान से लैस रहना चाहिए। रोगों से निपटने के लिए प्रशिक्षण और नई तकनीकों का उपयोग अत्यंत आवश्यक है। आधुनिक चिकित्सा में उन्नत तकनीकों को अपनाने से न केवल रोगों की शीघ्र और सटीक पहचान संभव होती है, बल्कि उपचार की गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार आता है। उन्होंने यह भी कहा कि निरंतर नवाचार और तकनीकी प्रगति से चिकित्सा प्रणाली अधिक सशक्त और प्रभावी बनती है।

सम्मेलन के आयोजक डॉ. सूर्यकान्त ने बताया कि सम्मेलन के प्रथम दिवस पर विभिन्न विषयों पर चार वर्कशॉप आयोजित की गईं, जिनमें पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन, मैकेनिकल वेंटिलेशन, इंटरस्टिशियल लंग डिजीज (आईएलडी) और स्लीप मेडिसिन शामिल हैं। इनमें से दो वर्कशॉप रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग में आयोजित की गईं। पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन वर्कशॉप का आयोजन विभाग से डॉ. संतोष कुमार एवं एस.एन. मेडिकल कॉलेज, आगरा से डॉ. गजेंद्र विक्रम सिंह के निर्देशन में सम्पन्न हुआ तथा मैकेनिकल वेंटिलेशन वर्कशॉप का आयोजन विभाग से डॉ. राजीव गर्ग एवं डॉ. ज्योति बाजपेयी के साथ चरक हॉस्पिटल, लखनऊ से डॉ. राघवेंद्र वग्यन्नावर एवं आरएमएल, लखनऊ के एनेस्थीसियोलॉजी विभाग से डॉ. पी.के. दास व गर्वन्मेन्ट इंस्ट्टिीयूट आफ मेडिकल सांइसेज के मार्गदर्शन में किया गया।

रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सूर्यकान्त ने बताया कि इस वर्कशॉप में क्रॉनिक रेस्पिरेटरी डिजीज में पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन की आवश्यकता एवं महत्व, उपयुक्त मरीज चयन, बेसलाइन असेसमेंट एवं व्यक्तिगत उपचार योजना तैयार करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। इसके साथ ही सार्कोपीनिया के प्रभाव, पोस्ट-टीबी सीक्वेली के प्रबंधन तथा मानसिक स्वास्थ्य एवं मनोवैज्ञानिक सहयोग की भूमिका को भी विस्तार से समझाया गया। वर्कशॉप के दौरान प्रतिभागियों को हैंड्स-ऑन सत्रों के माध्यम से 6 मिनट वॉक टेस्ट, श्वास संबंधी व्यायाम, एयरवे क्लीयरेंस तकनीक, मसल ट्रेनिंग तथा पोषण संबंधी परामर्श का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। विभाग का पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन सेंटर उत्तर प्रदेश का पहला ऐसा केंद्र है, जहाँ अब तक लगभग 3000 श्वसन रोगियों को पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन की सुविधा निःशुल्क प्रदान की गई है। पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन के संस्थापक प्रभारी डॉ. सूर्यकान्त एवं सह-प्रभारी डॉ. अंकित कुमार ने बताया कि इस वर्कशॉप के प्रतिभागियों की विशेष मांग पर देश का पहला पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया जाएगा, जहाँ देश भर के श्वसन रोग विशेषज्ञों व फिजियोथेरेपिस्ट को प्रशिक्षण दिया जाएगा।

उन्होंने बताया कि इसमें मैकेनिकल वेंटिलेशन के मूल सिद्धांत, वेंटिलेशन की शुरुआत, विभिन्न वेंटिलेटर मोड्स (बेसिक एवं एडवांस्ड), वेंटिलेटरी ग्राफ्स (स्केलर एवं लूप्स) की व्याख्या तथा वीएनिंग की रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा की गई। इसके अतिरिक्त नॉन-इनवेसिव वेंटिलेशन (एनआईवी) एवं हाई-फ्लो नेजल कैन्युला (एचएफएनसी) के उपयोग, संकेत एवं सीमाओं को भी स्पष्ट किया गया।

डॉ. सूर्यकान्त ने बताया कि दो वर्कशॉप रेस्पिवॉक कॉन्फ्रेंस के अंतर्गत उनके नेतृत्व में डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, लखनऊ में आयोजित की गईं। जिसका आयोजन डॉ. राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अजय कुमार वर्मा एवं संजीवनी हॉस्पिटल, लखनऊ से डॉ. एस.एन. गुप्ता द्वारा इंटरस्टिशियल लंग डिजीज (आईएलडी) वर्कशॉप के रूप में किया गया। इसमें रेडियोलॉजिकल इंटरप्रिटेशन, रुमेटोलॉजिकल रोगों से संबंधित आईएलडी तथा रोग के विभिन्न फेनोटाइप्स पर प्रशिक्षण दिया गया। हैंड्स-ऑन एवं केस-आधारित सत्रों में प्रतिभागियों को केस के माध्यम से आईएलडी की पहचान, रोग की प्रगति का आकलन एवं उपचार रणनीति विकसित करने का भी प्रशिक्षण दिया गया। उसके उपरान्त स्लीप स्टडी वर्कशॉप का आयोजन एडिशनल प्रोफेसर, आरएमएल से डॉ. हेमंत कुमार एवं निदेशक, स्लम्बर स्कोर इंस्टीट्यूट ऑफ स्लीप एजुकेशन से डॉ. स्वेता कंचन द्वारा सम्पन्न कराया गया।

डॉ. सूर्यकान्त ने वर्कशॉप में इंटरस्टिशियल लंग डिजीज (आईएलडी) पर प्रशिक्षण देते हुए इसके कारण, लक्षण और उपचार की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सही पहचान हेतु मरीज का विस्तृत इतिहास, शारीरिक परीक्षण, चेस्ट एक्स-रे, सीटी स्कैन तथा फेफड़ों की कार्यक्षमता जांच आवश्यक हैं। आईएलडी को नॉन-आईपीएफ और इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस (आईपीएफ) में बांटा जाता है। आईपीएफ में बिना कारण फेफड़ों में सिकुड़न आ जाती है, जिससे कार्यक्षमता घटती है। शुरुआत सूखी खांसी से होती है, बाद में सांस फूलने लगती है और गंभीर अवस्था में फेफड़े “हनीकॉम्ब” जैसे दिखते हैं।

स्नोरिंग एण्ड स्लीप रेलेटेड डिसआडर्स सोसाइटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा0 सूर्यकान्त ने बताया कि देश में 40 प्रतिशत पुरूष, 20 प्रतिशत महिलाए व 10 प्रतिशत बच्चे खर्राटे लेते हैं और लगभग 10 कारोड़ लोग ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया के शिकार हैं। ऐसे लोगों को नींद बहुत आती है और वे वाहन चलाते चलाते सो जाते है व एक्सीडेन्ट कर बैठते है। साथ ही ऐसे लोगो को बहुत सी बीमारियां जैसे डायबटीज, बीपी, हार्ट अटैक, स्ट्रोक आदि का खतरा भी ज्यादा रहता है। साथ ही उन्होंने बताया कि स्लीप एपनिया एवं अन्य स्लीप विकारों की पैथोफिजियोलॉजी, क्लिनिकल स्पेक्ट्रम, जोखिम कारक एवं जटिलताओं को विस्तार से समझाया गया। इसके साथ ही पॉलीसोमनोग्राफी (स्लीप स्टडी) के सेटअप, सिग्नल क्वालिटी एवं एएएसएम मानकों के अनुसार स्लीप स्टडी की व्याख्या पर विशेष ध्यान दिया गया। हैंड्स-ऑन सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को स्लीप स्टडी सेटअप, स्कोरिंग, इवेंट एनालिसिस एवं रिपोर्ट इंटरप्रिटेशन का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। एम्स, दिल्ली से आये डॉ. सौरभ मित्तल ने पीएपी थेरेपी और उसके इंटरफेस के सही चयन, टाइट्रेशन तथा नैदानिक अनुप्रयोग पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि उचित इंटरफेस का चयन मरीज की सुविधा और उपचार की प्रभावशीलता को सीधे प्रभावित करता है। टाइट्रेशन की सटीक प्रक्रिया से बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। कार्यशाला में व्यावहारिक पहलुओं पर विशेष जोर दिया गया, जिससे प्रतिभागियों को वास्तविक परिस्थितियों में थेरेपी के उपयोग की बेहतर समझ मिली। यह सत्र श्वसन रोगों के प्रबंधन में उन्नत तकनीकों के महत्व को रेखांकित करता है। डॉ. सूर्यकान्त ने बताया कि समस्त वर्कशॉप के सफल प्रशिक्षण के पश्चात सभी को सर्टिफिकेट प्रदान किए गए एवं कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए प्रथम दिन के समापन की घोषणा की। उन्होंने बताया कि सम्मेलन के दूसरे दिन, कल रविवार को विशेषज्ञों के व्याख्यान, पैनल डिस्कशन, साइंटिफिक सेशन और पीजी क्विज का आयोजन किया जाएगा।

totaramnews1@gmail.com

totaramnews1@gmail.com http://totaram.news

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent News

Trending News

Editor's Picks

हिन्दुत्व के पुरोधा अशोक सिंहल

राम जन्मभूमि आंदोलन, सामाजिक समरसता, गोरक्षा और हिंदू जागरण में उनके योगदान की स्मृति बृजनन्दन राजू। लखनऊ। अशोक सिंहल का नाम आते ही लोगों के मन मस्तिष्क पर राम मंदिर आन्दोलन का परिदृश्य आ जाता है। अशोक सिंहल श्रीराम जन्मभूमि आन्दोलन के ही महानायक नहीं थे। वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक, सामाजिक समरसता के...

UPITS 2026 में दिखा हुनर का जादू, ‘आओ करके सीखें’ थीम ने खींचा दर्शकों का ध्यान

UPSDM पवेलियन में हुनर से रूबरू हुए दर्शक, खुद हाथ आजमाकर सीखे कौशल ग्रेटर नोएडा/ लखनऊ। उत्तर प्रदेश की कला, कौशल और कारीगरी को वैश्विक मंच देने वाले UP International Trade Show 2026 (UPITS) के दूसरे दिन उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (UPSDM) के पवेलियन में हुनर का अलग ही रंग देखने को मिला। ‘आओ...

अमित शाह ने केरलम के कोल्लम में महिला सशक्तीकरण और सहकारिता से जुड़ी विभिन्न पहलों का शुभारंभ किया

अमित शाह ने ‘वनिथम शी मार्ट शॉप्स’ का लोकार्पण किया  डेस्क। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के “सहकार से समृद्धि” के विजन के अनुरूप तथा सहकारिता के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और महिला-नेतृत्व वाले विकास को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित...

Guntur-Nambur के बीच ₹108 करोड़ के चार लेन ROB की आधारशिला रखी गई

668 मीटर लंबे पुल से लेवल क्रॉसिंग गेट नंबर-3 हटेगा, यातायात और रेल सुरक्षा में होगा सुधार डेस्क। “नया रेलवे, नया आंध्र प्रदेश” की परिकल्पना के तहत शहरी आवागमन और रेल सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, गुंटूर और नंबूर रेलवे स्टेशनों के बीच चार लेन वाले रोड ओवर...

मनमोहन सिंह की जयंती पर PM मोदी ने दी श्रद्धांजलि

कहा- लंबे सार्वजनिक जीवन में समर्पण के साथ राष्ट्र की सेवा की डेस्क। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह जी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि डॉ. सिंह ने कई वर्षों तक सार्वजनिक जीवन में रहकर समर्पण के साथ राष्ट्र की सेवा की। प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर...

TN

TOTARAM News

तोताराम न्यूज़ – सच्ची, सरल और ट्रेंडिंग  खबरों का नया ठिकाना।
यहाँ हर खबर मिलेगी बिना तोड़-मरोड़ के, सीधे जनता की आवाज़ के साथ।.

क्विक लिंक्स

पॉपुलर कैटेगरीज़

अवश्य पढ़ें

©2025– TotaRam.news All Right Reserved.