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“जेपी नड्डा ने तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को संबोधित किया”

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डेस्क। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने आज मुरादाबाद स्थित तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। जेपी नड्डा ने स्नातक छात्रों को बधाई देते हुए दीक्षांत समारोह को छात्रों के जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताया जो वर्षों के समर्पण, दृढ़ता, अनुशासन और शैक्षणिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह न केवल शैक्षणिक यात्रा की समाप्ति का प्रतीक है, बल्कि उत्तरदायित्व और सेवा के एक नए अध्याय की शुरुआत भी है। उन्होंने स्नातक छात्रों को सशक्त मूल्यों के साथ आगे बढ़ने और राष्ट्र एवं समाज में सार्थक योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया। जेपी नड्डा ने कहा, “भारत के अमृतकाल के दूसरे चरण के दौरान पेशेवर जगत में प्रवेश करना आपके लिए सौभाग्य की बात है, क्योंकि देश 2047 तक एक विकसित भारत के लक्ष्य की ओर अग्रसर है। यह अवधि युवा पेशेवरों के लिए राष्ट्र के भविष्य को आकार देने का अवसर और जिम्मेदारी दोनों प्रस्तुत करती है।”
जेपी नड्डा ने तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय के प्रयासों की सराहना करते हुए चिकित्सा और संबद्ध स्वास्थ्य क्षेत्रों में शिक्षा को बढ़ावा देने में संस्थान के योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा संचालित लगभग 150 शैक्षणिक कार्यक्रमों में से लगभग 60 प्रतिशत चिकित्सा और संबद्ध स्वास्थ्य विषयों को समर्पित हैं, जो देश के लिए सक्षम और कुशल स्वास्थ्य सेवा कार्यबल तैयार करने पर विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
जेपी नड्डा ने शिक्षा तक व्यापक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को भी स्वीकार किया। उन्होंने बताया कि संस्थान ने विभिन्न पृष्ठभूमियों के छात्रों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने और अपने शैक्षणिक लक्ष्यों को हासिल करने में सहायता देने के लिए लगभग 75 करोड़ रुपये की छात्रवृत्तियां प्रदान की हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पहल समावेशी शिक्षा, अकादमिक उत्कृष्टता और भारत के बढ़ते स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में सार्थक योगदान देने वाले कुशल पेशेवरों के विकास को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को व्यक्त करती है। जेपी नड्डा ने पिछले एक दशक में भारत के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में हुए परिवर्तनकारी बदलावों पर प्रकाश डालते हुए, कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे का विस्तार करने, चिकित्सा शिक्षा को मजबूत करने और देश भर में सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच में सुधार करने के लिए निरंतर प्रयास किए हैं।
उन्होंने कहा, “पिछले ग्यारह वर्षों में भारत में प्रमुख चिकित्सा संस्थानों का उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। अखिल भारतीय आयुर्वेद विज्ञान संस्थानों की संख्या पहले के छह से बढ़कर आज 23 हो गई है, जिससे तृतीयक स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत हुई हैं और देश भर में उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा शिक्षा और शोध के नए अवसर पैदा हुए हैं।” भारत ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य परिणामों में सुधार लाने में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। उन्होंने वैश्विक अनुमानों का हवाला देते हुए बताया कि भारत में मातृ मृत्यु दर में लगभग 86 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह कमी लगभग 48 प्रतिशत है। यह निरंतर जन स्वास्थ्य समाधान पहल के प्रभाव को दर्शाता है। भारत के तपेदिक उन्मूलन के प्रयासों के बारे में उन्होंने उल्लेख किया कि भारत ने टीबी के मामलों में 21 प्रतिशत की कमी हासिल की है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा रिपोर्ट की गई वैश्विक कमी 12 प्रतिशत से काफी अधिक है।
जेपी नड्डा ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार नागरिकों पर स्वास्थ्य सेवाओं के वित्तीय बोझ को कम करने के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य सेवाओं पर जेब से होने वाला खर्च (ओओपीई) 62.6 प्रतिशत से घटकर 39.4 प्रतिशत हो गया है, जो स्वास्थ्य सेवाओं को लोगों के लिए अधिक किफायती और सुलभ बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने भारत में समय पर उपचार की सुविधा को मजबूत करने की दिशा में हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए द लैंसेट के निष्कर्षों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि भारत में लगभग 90 प्रतिशत कैंसर रोगियों का उपचार 20 दिनों के भीतर शुरू हो जाता है, जो स्वास्थ्य प्रणाली में प्रारंभिक निदान और उपचार प्रक्रियाओं में सुधार को दर्शाता है। उन्होंने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के परिवर्तनकारी प्रभाव को भी रेखांकित किया और इसे विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना बताया, जो माध्यमिक और तृतीयक स्तर के अस्पताल में भर्ती होने पर प्रति परिवार को पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा प्रदान करती है। मंत्री ने कहा कि इस योजना ने स्वास्थ्य सेवा में वित्तीय सुरक्षा का व्यापक विस्तार किया है और 71 करोड़ से अधिक लोगों को लाभ पहुंचाया है, जिससे लाखों परिवारों को आर्थिक कठिनाई के बिना गुणवत्तापूर्ण उपचार प्राप्त करने में मदद मिली है।
जेपी नड्डा ने स्नातक छात्रों को संबोधित करते हुए उन्हें याद दिलाया कि उनकी शैक्षणिक उपलब्धियां माता-पिता, शिक्षकों, मार्गदर्शकों, विश्वविद्यालय कर्मचारियों और संस्थागत सहयोग प्रणालियों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम हैं। उन्होंने कहा, “हर डिग्री के पीछे परिवारों, शिक्षकों और उन संस्थानों का मौन योगदान और प्रोत्साहन निहित है जो छात्रों को सफलता की ओर मार्गदर्शन करते हैं।” उन्होंने छात्रों से अपने पेशेवर जीवन में सामाजिक जिम्मेदारी की प्रबल भावना रखने का आग्रह करते हुए कहा, “हमेशा याद रखें कि समाज ने ही आपको वो अवसर और संसाधन प्रदान किए हैं जिनकी बदौलत आप आज इस मुकाम पर हैं। स दृढ़ विश्वास को अपने साथ रखें कि आपको समाज को कुछ वापस देना है और व्यापक भलाई के लिए काम करना है।” दीक्षांत समारोह में विश्वविद्यालय के 14 घटक कॉलेजों के स्नातक, स्नातकोत्तर, डॉक्टरेट और डिप्लोमा कार्यक्रमों के 6,041 छात्र एक साथ आए। इनमें से 2,577 डिग्रियां 2023-24 शैक्षणिक सत्र से संबंधित हैं, जबकि 3,464 डिग्रियां 2024-25 शैक्षणिक सत्र से संबंधित हैं।
वर्ष 2024-25 के शैक्षणिक सत्र में उल्लेखनीय शैक्षणिक उपलब्धि दर्ज की गई है, जिसमें सभी पदक श्रेणियों में मेधावी छात्रों की संख्या बहुमत में रही है। 156 पदक प्राप्तकर्ताओं में से 112 लड़कियां और 44 लड़के हैं। इन पदकों में 54 स्वर्ण पदक (40 लड़कियां, 14 लड़के), 52 रजत पदक (35 लड़कियां, 17 लड़के) और 50 कांस्य पदक (37 लड़कियां, 13 लड़के) शामिल हैं। इसी प्रकार, 2023-24 के शैक्षणिक सत्र में 155 पदक प्राप्तकर्ताओं का रिकॉर्ड दर्ज किया गया है, जिनमें 103 लड़कियां और 52 लड़के शामिल थे, जो सभी विषयों में लड़कियों के बेहतर और लगातार शैक्षणिक प्रदर्शन को दर्शाता है। विश्वविद्यालय ने 2024-25 के शैक्षणिक सत्र में 3,464 डिग्रियां प्रदान कीं, जिनमें 36 पीएचडी डिग्रियां (19 महिलाएं और 17 पुरुष), 832 स्नातकोत्तर डिग्रियां, 2,490 स्नातक डिग्रियां और 106 डिप्लोमा प्रमाणपत्र शामिल हैं। 2023-24 के शैक्षणिक सत्र में 2,577 डिग्रियां प्रदान की गईं, जिनमें 1,056 छात्राएं और 1,521 छात्र शामिल थे। इस दीक्षांत कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक; उत्तर प्रदेश सरकार में वित्त और संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, विश्वविद्यालय के अग्रणी शिक्षाविद और प्रशासनिक विभाग के अधिकारी भी उपस्थित थे।

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