प्रदेश की ग्रामीण विरासत को पर्यटन से जोड़ रही सरकार- जयवीर सिंह
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने की पहल के तहत अब स्कूली छात्रों को भी प्रदेश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इसी क्रम में ‘विजिट माय स्टेट उत्तर प्रदेश’ अभियान के अंतर्गत गाजीपुर के 108 विद्यार्थियों और शिक्षकों ने अंबेडकर नगर स्थित श्रवण धाम का भ्रमण किया। इस पहल का उद्देश्य शैक्षिक यात्राओं के माध्यम से कम चर्चित (अल्पज्ञात) पर्यटन स्थलों को पहचान दिलाने के साथ-साथ ग्रामीण समुदायों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर विकसित करना है।
चिउंटीपारा गांव स्थित श्रवण धाम में विद्यार्थियों को रामायणकालीन प्रसंगों और स्थानीय धार्मिक विरासत से रूबरू कराया गया। गांव के समन्वयक महेंद्र गौर और कथावाचक सुनील मिश्रा ने आरके पब्लिक स्कूल, बहरी के विद्यार्थियों व शिक्षकों को श्रवण कुमार की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि किस तरह श्रवण कुमार ने अपने नेत्रहीन माता-पिता की सेवा और तीर्थयात्रा को जीवन का ध्येय बनाया। कथा के माध्यम से विद्यार्थियों को मातृ-पितृ भक्ति, सेवा और समर्पण के मूल्यों से परिचित कराया गया। इसके बाद विद्यार्थियों ने मंदिरों और पवित्र घाटों का भ्रमण किया। इस दौरान उन्हें पौराणिक कथाओं और क्षेत्र की धार्मिक परंपराओं के आपसी जुड़ाव को करीब से समझने का अवसर मिला।
‘गांवों की विरासत से जुड़ेंगे युवा, बढ़ेंगे रोजगार के अवसर’
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि ‘प्रदेश के गांवों में संरक्षित विरासत से युवाओं को रूबरू कराना जरूरी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार सांस्कृतिक धरोहरों को पर्यटन से जोड़कर स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर तैयार कर रही है। ‘विजिट माय स्टेट’ अभियान के जरिए विद्यार्थियों को अपनी जड़ों से जोड़ने और प्रदेश के ऐतिहासिक व सांस्कृतिक स्थलों को करीब से जानने का अवसर दिया जा रहा है। इससे न केवल शैक्षिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि पर्यटकों की मेजबानी करने वाले ग्रामीण परिवारों, शिल्पकारों और स्थानीय युवाओं की आय बढ़ाने के रास्ते भी खुलेंगे।’
ग्रामीण पर्यटन का नया केंद्र बना चिउंटीपारा
उल्लेखनीय है कि अम्बेडकरनगर के चिउंटीपारा गांव को पर्यटन विभाग की ओर से ‘एग्री रूरल एंड गंगे ग्राम रूरल टूरिज्म’ पहल के तहत पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां धार्मिक आस्था, नदी तट के मनोरम परिवेश और गांव की पारंपरिक मेहमाननवाजी का अनूठा संगम देखने को मिलता है। यह पहल पर्यटकों को तीर्थस्थल के दर्शन के साथ ही ग्रामीण जीवन, स्थानीय संस्कृति और क्षेत्र की विरासत को करीब से जानने का अवसर दे रही है।
यहां आने वाले पर्यटकों के लिए रामघाट पर संध्या आरती और भक्ति गीतों का अनुभव, श्रवण क्षेत्र के मंदिरों का भ्रमण तथा तमसा, मांडवा और विसुई नदियों के संगम पर नौकायन जैसी गतिविधियां उपलब्ध हैं। इसके अलावा, नजदीकी दरवां झील में नौकायन, फोटोग्राफी और सर्दियों में पक्षियों को देखने का अवसर मिलता है। इससे धार्मिक पर्यटन के साथ प्रकृति आधारित पर्यटन को भी बढ़ावा मिल रहा है।
ग्रामीण पर्यटन से बढ़ेंगे रोजगार- जिलाधिकारी
जिलाधिकारी ईशा प्रिया ने कहा कि ‘श्रवण कुमार की कथा को उसी धरती पर सुनना, जिसका संबंध इस पौराणिक प्रसंग से जुड़ा है, विद्यार्थियों के लिए यादगार अनुभव है। अंबेडकरनगर में धार्मिक विरासत के साथ नदी के मनोरम तट, स्थानीय हस्तशिल्प और ग्रामीण जीवन की समृद्ध परंपराएं भी पर्यटन की बड़ी संभावनाएं समेटे हैं। जरूरत इन आकर्षणों को व्यापक पहचान दिलाने की है। प्रशासन का प्रयास है कि पर्यटक केवल तीर्थस्थलों तक सीमित न रहें, बल्कि जिले की सांस्कृतिक विरासत और ग्रामीण जीवन से भी रूबरू हों। इससे स्थानीय लोगों को कथावाचक, गाइड और मेजबान के रूप में अवसर मिलेंगे और ग्रामीण पर्यटन के जरिये गांवों में रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।
ग्रामीण जीवन, देसी जायका और फार्म स्टे का आकर्षण
होमस्टे में ठहरकर पर्यटक गांव के अपनत्व, स्थानीय आतिथ्य और घर में बने पारंपरिक भोजन का आनंद ले सकते हैं। मिट्टी के बर्तन बनाने, अगरबत्ती निर्माण और खजला व बालूशाही जैसी क्षेत्रीय मिठाइयों के जरिए उन्हें स्थानीय हुनर और जायके से रूबरू होने का मौका मिलता है। वहीं, जिले के अन्य क्षेत्रों में फार्म स्टे के तहत कॉटेज में ठहरने के साथ पौधरोपण, फसल कटाई जैसी कृषि गतिविधियों में भागीदारी और ताजा कृषि उपज से तैयार भोजन का स्वाद लेने का अनुभव भी पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है।
इस प्रकार शैक्षिक पर्यटन उत्तर प्रदेश के गांवों को पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने के साथ-साथ स्थानीय निवासियों को अपनी संस्कृति, परंपराओं और कौशल को साझा करने तथा पर्यटन से होने वाले आर्थिक लाभ में भागीदारी का अवसर प्रदान कर रहा है।
