बिजनौर, पीलीभीत, देवरिया और ललितपुर के मंदिरों में भी श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं विकसित
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 से धार्मिक पर्यटन के विकास के तहत सभी 75 जनपदों के देवी मंदिरों को लाभ पहुंचा है। प्रमुख शक्तिपीठों के साथ स्थानीय स्तर पर पूजनीय देवी मंदिरों को भी पर्यटन विकास योजनाओं से जोड़ा जा रहा है। इससे क्षेत्रीय आस्था और परंपराओं को पहचान देने के साथ श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं बढ़ाने तथा स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित करने का प्रयास किया जा रहा है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बुधवार को लखनऊ के चौक स्थित बड़ी काली मंदिर में दर्शन-पूजन के बाद यह बात कही। उन्होंने मिशन शक्ति के तहत प्रदेश के 26 देवी मंदिरों में आयोजित होने वाले नवरात्रि विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला का शुभारंभ भी किया।
मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि ‘मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश के उन देवी मंदिरों को भी पर्यटन विकास से जोड़ा जा रहा है, जिनकी स्थानीय स्तर पर विशेष धार्मिक मान्यताएं हैं। पीढ़ियों से इन मंदिरों से जुड़ी आस्था और परंपराओं को व्यापक पहचान दिलाना सरकार का उद्देश्य है। उन्होंने आगे कहा कि नवरात्रि शक्ति की आराधना के साथ महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा और समाज में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने का भी संदेश देती है। तीर्थस्थलों पर बेहतर सुविधाएं और स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसर इस प्रयास का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। मंत्री जयवीर सिंह ने ये भी कहा कि बड़ी काली मंदिर के पर्यटन विकास के लिए प्रदेश सरकार ने 227.83 लाख रुपए से अधिक की धनराशि स्वीकृत की है।’
83 करोड़ रुपए की 22 प्रमुख परियोजनाएं
वर्ष 2017 से प्रदेश में देवी मंदिरों के विकास के लिए किए जा रहे व्यापक प्रयासों के तहत 19 जिलों के 20 देवी स्थलों पर करीब 83 करोड़ रुपए की लागत से 22 प्रमुख परियोजनाएं शामिल हैं। ये परियोजनाएं प्रदेश के सभी 75 जनपदों में देवी मंदिरों को लाभ पहुंचाने वाली विकास प्रक्रिया का हिस्सा हैं। उत्तर प्रदेश के शक्तिपीठ पर्यटन सर्किट में सहारनपुर स्थित मां शाकुंभरी देवी, नैमिषारण्य स्थित मां ललिता देवी, बलरामपुर स्थित देवीपाटन मंदिर, विंध्याचल स्थित मां विंध्यवासिनी और वाराणसी स्थित मां विशालाक्षी देवी जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल शामिल हैं। इन प्रसिद्ध स्थलों पर सुविधाओं के विस्तार के साथ क्षेत्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण माने जाने वाले देवी मंदिरों का भी विकास किया जा रहा है
स्थानीय देवी मंदिरों को भी मिल रही पहचान
मंत्री ने बताया कि ‘प्रदेश में धार्मिक पर्यटन का विस्तार अब उन मंदिरों तक भी पहुंच रहा है, जिनकी पहचान लंबे समय से स्थानीय श्रद्धालुओं तक सीमित (अल्पज्ञात) रही है। इनमें बिजनौर का मां रुक्मणी गाला माता मंदिर, पीलीभीत का गुंगा देवी मंदिर, देवरिया का करमेल माता मंदिर और ललितपुर का देवा माता मंदिर प्रमुख हैं। इसके अलावा बहराइच स्थित मां गुल्ला वीर मंदिर, श्रावस्ती स्थित मां जगत जननी सीता माता मंदिर और गौतम बुद्ध नगर स्थित मां भुड़ावाली देवी मंदिर भी विकास कार्यों में शामिल हैं। इन मंदिरों के विकास से संबंधित जिलों की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को व्यापक स्तर पर पहचान मिलने की उम्मीद है।
प्रमुख शक्तिपीठों पर श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का विस्तार
प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर किए जा रहे विकास कार्यों में ठहरने की व्यवस्था, पैदल मार्ग, प्रकाश व्यवस्था, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए स्थान सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है। सहारनपुर स्थित मां शाकुंभरी देवी शक्तिपीठ में लगभग 39 करोड़ रुपए की लागत से तीन परियोजनाएं शामिल हैं। इनमें राही पर्यटक विश्राम गृह, ओपन एयर थिएटर, पैदल मार्ग को मजबूत करना और श्रद्धालुओं के लिए अतिरिक्त सुविधाओं का विकास शामिल है। विश्राम गृह बनने से दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को ठहरने का विकल्प मिलेगा। वहीं, ओपन एयर थिएटर के माध्यम से धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन को प्रोत्साहन मिल सकेगा।

वहीं, नैमिषारण्य स्थित ललिता देवी मंदिर में 15.23 करोड़ रुपए की लागत से परियोजना शुरू की गई है। लखनऊ स्थित मां चंद्रिका देवी मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण पर 6.30 करोड़ रुपए खर्च किए जाने की योजना है। भदोही स्थित श्री सीता समाहित स्थल के पर्यटन विकास के लिए 3.52 करोड़ रुपये की परियोजना शामिल है। वहीं, बलरामपुर के देवीपाटन मंदिर में 3.29 करोड़ रुपये और प्रयागराज के अलोपी देवी शक्तिपीठ में 1.67 करोड़ रुपए की लागत से फसाड लाइटिंग परियोजनाएं शामिल हैं।
अन्य देवी मंदिर भी विकास योजनाओं में शामिल
उन्होंने बताया कि प्रदेश के अन्य धार्मिक स्थलों में रायबरेली स्थित चामुंडा शक्तिपीठ, बांदा स्थित मां सिंहवाहिनी देवी शक्तिपीठ, बलरामपुर स्थित जुआ देवी शक्तिपीठ और प्रतापगढ़ स्थित मां ज्वाला देवी धाम सिद्धपीठ शामिल हैं। इसके अतिरिक्त मिर्जापुर में मां विंध्यवासिनी से संबंधित मंदिर परिसर, जौनपुर स्थित मां शीतला चौकिया धाम और कानपुर नगर के घाटमपुर स्थित मां कुष्मांडा मंदिर को भी विकास योजनाओं में शामिल किया गया है।
पर्यटन पैकेजों से भी जुड़ रहे प्रमुख धार्मिक स्थल
पर्यटन मंत्री ने कहा कि ‘धार्मिक स्थलों पर बुनियादी सुविधाओं के विकास के साथ-साथ ऑर्गेनाइज्ड टूरिस्ट ट्रिप को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। ‘विजिट माय स्टेट, उत्तर प्रदेश’ अभियान के अंतर्गत उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी) ने इस वर्ष लखनऊ से नैमिषारण्य और प्रयागराज से विंध्याचल के लिए साप्ताहिक पर्यटन यात्राएं शुरू की हैं। इन पैकेजों में भोजन, जलपान और स्थानीय गाइड की सुविधा भी शामिल है। इससे श्रद्धालुओं को यात्रा की बेहतर योजना बनाने और संबंधित धार्मिक स्थलों के इतिहास एवं सांस्कृतिक महत्व को समझने में सहायता मिलेगी।’

मंदिर परिसरों में बेहतर पैदल मार्ग, प्रकाश व्यवस्था और विश्राम सुविधाओं से महिलाओं, बुजुर्गों और परिवारों की यात्रा सुगम होगी। ठहरने की बेहतर व्यवस्था से श्रद्धालु आसपास के अन्य धार्मिक व पर्यटन स्थलों का भी रुख कर सकेंगे। इससे स्थानीय स्तर पर पर्यटन गतिविधियां बढ़ेंगी और परिवहन, खानपान, फूल-माला, प्रसाद, हस्तशिल्प व गाइड सेवाओं से जुड़े लोगों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर पैदा होंगे।
आस्था के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती- मंत्री
पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि ‘सरकार का उद्देश्य आस्था को अर्थव्यवस्था से जोड़ना है। मंदिरों के आसपास विकसित होने वाली पर्यटन गतिविधियों का लाभ महिला स्वयं सहायता समूहों, कारीगरों, फूल-प्रसाद विक्रेताओं, स्थानीय गाइडों और भोजन व ठहरने की सुविधा देने वाले परिवारों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा कि धार्मिक पर्यटन का विकास केवल मंदिरों की सुविधाओं तक सीमित नहीं है, इसके माध्यम से स्थानीय परंपराओं की पहचान, रोजगार के अवसर बढ़ाने और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का भी प्रयास किया जा रहा है।’
