दिल्ली-कोलकाता की महिला उद्यमियों को भाया वाराणसी का नया रूप
लखनऊ/वाराणसी। नई दिल्ली की दीपाली गर्ग पहले भी वाराणसी आ चुकी हैं, लेकिन इस बार काशी को देखने का उनका नजरिया बदल गया। गंगा आरती की आध्यात्मिकता से लेकर बनारसी साड़ियों के पीछे की कारीगरी तक, उन्होंने शहर को उसके लोगों और हुनर के जरिए करीब से जाना। उत्तर प्रदेश पर्यटन की ‘विजिट माय स्टेट’ यात्रा में शामिल करीब 50 महिला उद्यमियों, निवेशकों और डिजिटल क्रिएटर्स के लिए काशी का यह अनुभव सिर्फ पर्यटन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यहां की कला, संस्कृति और स्थानीय कारोबार को समझने का अवसर भी बना।
उत्तर प्रदेश पर्यटन और फिक्की फ्लो के सहयोग से आयोजित तीन दिवसीय यात्रा का उद्देश्य प्रतिभागियों को खानपान, शिल्प, आस्था और विरासत का प्रत्यक्ष अनुभव कराना है। 7 से 9 अक्तूबर तक चल रही यह यात्रा लखनऊ से शुरू हुई और लखनऊ में ही समाप्त होगी। प्रतिभागियों के अनुभवों को उनके पेशेवर नेटवर्क और डिजिटल कम्युनिटी तक पहुंचाने की योजना है, ताकि काशी और उत्तर प्रदेश के दूसरे पर्यटन स्थलों के लिए नए यात्री, बाजार और कारोबारी जुड़ाव तैयार हो सकें।

काशी में गंगा आरती से बनारसी बुनकरों तक पहुंचीं महिला उद्यमी
वाराणसी में यात्रा की शुरुआत काशी विश्वनाथ मंदिर और अस्सी घाट से हुई। बुधवार शाम को प्रतिभागियों ने गंगा आरती देखी और काशी के नदी किनारे बसे जीवन को करीब से समझा। अगले दिन सूर्योदय के समय क्रूज के जरिए ऐतिहासिक घाटों और उनकी स्थापत्य विरासत को देखा गया। इसके बाद बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, न्यू विश्वनाथ मंदिर और रामनगर किले का भ्रमण किया गया। इस दौरान प्रतिभागियों को यह समझने का अवसर मिला कि काशी की पहचान केवल उसके प्रसिद्ध स्थलों से नहीं, बल्कि रोजमर्रा के जीवन और सदियों पुरानी परंपराओं से भी बनती है।
यात्रा का एक अहम पड़ाव बनारसी बुनकरों के बीच भी रहा, जहां महिला उद्यमियों ने बुनकरों, हैंडलूम विशेषज्ञों और कारोबारियों से मुलाकात कर बनारसी कपड़ों के पीछे की पूरी मेहनत को समझा। उन्होंने डिजाइन, बुनाई और पारंपरिक कारीगरी की बारीकियां जानीं। इस मुलाकात ने पर्यटन की कहानी में कारीगरों को भी केंद्र में ला दिया। प्रतिभागियों के लिए यह अनुभव इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि फैशन, डिजाइन और कारोबार से जुड़ी होने के कारण वे स्थानीय हुनर को नए ग्राहकों और बाजारों से जोड़ने की संभावनाओं पर भी काम कर सकती हैं।

काशी पर्यटन को बाजार और स्थानीय हुनर से जोड़ने पर जोर
कोलकाता, पश्चिम बंगाल की अपुर्वा रस्तोगी ने कहा कि मुझे काशी को बिल्कुल अलग नजरिए से जानने का मौका मिला। काशी की आध्यात्मिक ऊर्जा, गंगा की सुंदरता और बनारसी साड़ियों के पीछे की कारीगरी का अनुभव मेरे लिए बहुत खास रहा। उन्होंने उत्तर प्रदेश पर्यटन का आभार जताते हुए कहा इस यात्रा ने मुझे शहर को एक अलग दृष्टि से समझने का अवसर दिया। पुणे की शुभांगी शुक्ला ने कहा कि यात्रा के दौरान उत्तर प्रदेश को लोकप्रिय पर्यटन स्थलों से आगे देखने का मौका मिला। कारीगरों से मिलकर और जीवंत परंपराओं को करीब से देखकर मुझे इन कहानियों को बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचाने का नया नजरिया मिला।
पर्यटन विभाग के लिए इन प्रत्यक्ष अनुभवों का महत्व इसलिए भी है क्योंकि प्रतिभागियों का जुड़ाव कारोबार, हॉस्पिटैलिटी, ट्रैवल और डिजिटल कम्युनिकेशन जैसे क्षेत्रों से है। कारीगरों से सीधी मुलाकात से सोर्सिंग, स्टाइलिंग और कारोबारी सहयोग की नई संभावनाएं बन सकती हैं। वहीं डिजिटल क्रिएटर्स और उद्यमियों के जरिए स्थानीय शिल्प और काशी की कहानियां संभावित पर्यटकों, ग्राहकों और नए कारोबारी साझेदारों तक पहुंच सकती हैं। इस तरह पर्यटन अनुभव को स्थानीय हुनर और बाजार से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश के पर्यटन की असली ताकत उसके ऐतिहासिक स्थलों के साथ-साथ यहां के लोगों, उनकी कला, शिल्प, खानपान और सदियों पुरानी परंपराओं में है। ‘विजिट माय स्टेट’ जैसी पहल के जरिए हमारा प्रयास है कि पर्यटक किसी स्थान को केवल देखकर न लौटें, बल्कि वहां की संस्कृति और स्थानीय जीवन को करीब से समझें और उसकी कहानी अपने साथ लेकर जाएं। उन्होंने बताया जब महिला उद्यमी, निवेशक और डिजिटल क्रिएटर्स सीधे कारीगरों और स्थानीय समुदायों से जुड़ते हैं तो पर्यटन को नए बाजार और नई पहचान मिलती है।

यात्रा के अंतिम दिन प्रतिभागी यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल सारनाथ जाएंगे। यहां बौद्ध विरासत से जुड़े स्थलों का भ्रमण कर काशी की जीवंत सांस्कृतिक पहचान को उत्तर प्रदेश के व्यापक बौद्ध पर्यटन सर्किट से जोड़ा जाएगा। वापसी से पहले होने वाली चर्चा में प्रतिभागी यात्रा के अनुभवों, पर्यटन से जुड़ी नई कहानियों, डिजिटल कंटेंट और संभावित सहयोग पर विचार करेंगे।
