एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने जारी किये आदेश, फायर एनओसी के बिना नहीं जारी होगा मानचित्र
लखनऊ। लखनऊ में भवन मानचित्र स्वीकृत कराने के लिए अब अग्नि सुरक्षा पहली शर्त होगी। शहर में अग्नि जनित हादसों पर प्रभावी रोक लगाने और नागरिकों की जान-माल की सुरक्षा के दृष्टिगत लखनऊ विकास प्राधिकरण ने इसके लिए नयी व्यवस्था लागू कर दी है।
इसके तहत अब फायर एनओसी के दायरे में आने वाले समस्त व्यावसायिक एवं सार्वजनिक उपयोग वाले भवनों के मानचित्र बिना वैध प्रमाण पत्र के जारी नहीं किये जाएंगे। एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने इस सम्बंध में स्पष्ट आदेश जारी कर दिये हैं। इसमें उत्तर प्रदेश अग्नि सुरक्षा एवं आपात सेवा अधिनियम 2022 तथा उत्तर प्रदेश अग्नि सुरक्षा एवं आपात सेवा नियमावली 2024 के प्रावधानों के अनुपालन को भी अनिवार्य कर दिया गया है।
लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि जिन भवनों के लिए नियमानुसार फायर एनओसी अनिवार्य है, उनका मानचित्र तभी जारी किया जाएगा, जब अग्निशमन विभाग द्वारा जारी वैध प्रमाण पत्र साथ में लगा हो। फायर एनओसी के बिना ऐसे किसी भी भवन का मानचित्र स्वीकृत नहीं किया जाएगा। इससे भवन निर्माण से पहले ही अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित कराया जा सकेगा।
एनओसी के दायरे में न आने वाले भवनों में भी सुरक्षा अनिवार्य
उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि 15 मीटर से कम ऊंचाई या 500 वर्गमीटर से कम क्षेत्रफल वाले होटल, स्कूल, अस्पताल, कोचिंग जैसे भवनों में फायर एनओसी भले ही अनिवार्य न हो, लेकिन मानचित्र स्वीकृत कराते समय भवन स्वामी को फायर/विद्युत सुरक्षा से सम्बंधित शपथ पत्र देना होगा। साथ ही मानचित्र स्वीकृति के 03 महीने के अंदर या तो अग्नि सुरक्षा प्रमाण-पत्र या अग्निशमन विभाग से फायर ऑडिट कराना होगा। ऐसा न करने पर कार्रवाई की जाएगी।
इन भवनों पर लागू होंगे नियम
उपाध्यक्ष ने बताया कि बीते कुछ वर्षों में 15 मीटर से कम ऊंचाई वाले व्यावसायिक एवं बहुमंजिला भवनों में अग्नि जनित घटनाएं बढ़ी हैं। ऐसे में अब निर्माण शुरू होने से पहले ही सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित कराया जाएगा। खासतौर से उन भवनों में जहां लोगों का अधिक जुटाव होता है। इस श्रेणी में असेंबली, व्यावसायिक, संस्थागत, शैक्षणिक संस्थान, चिकित्सालय, होटल एवं गेस्ट हाउस, रेस्टोरेंट एवं बैन्क्वेट हाॅल, कोचिंग सेंटर, लाइब्रेरी, बैंक, सिनेमा/थियेटर, जिम एवं विशेष उपयोग वाले भवनों को शामिल किया गया है।
